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अल्मोड़ा  आज मतदान केन्द्रो मे मतदान के प्रति उत्साह मे कमी खली ।वही 92 वर्षीय बुजुर्ग राष्टपति सम्मान से सम्मानित डा जयदत्त उप्रेती मतदान करने मतदान केन्द्र मे पहुचे ।

मतदाताओं मे उत्साह की कमी के बीच ही देश मे मतदान का पहला चरण समाप्त हो गया। मतदाताओं  के रुझान की बात करें तो मतदान के प्रति उत्साह मे कमी चिन्ता का बिषय है ।उत्तराखंड समेत देश के कई राज्यो में लोकसभा चुनावो मे भी मतप्रतिशत गिरा है । उत्तराखण्ड़ राज्य की बात करे तो यहाँ पर्वतीय जनपदों मे मतदान गिरा है ,तो वही मैदानी क्षेत्रों मे मतदान का प्रतिशत औषत रहा है। उत्तराखण्ड में राज्य की पांचो लोकसभा सीटों में उम्मीदवारों का मत प्रतिशत 2019 के मतदान की  तूलना मे  लगभग  4.75% गिरा है ।यह कम मतदान आंकड़ों मे उलटफेर के लिये काफी है । इसे देखते हुवे सत्ता व विपक्षी पार्टियों मे काफी हलचल है । तथा सभी राजनैतिक दल अपने -अपने हिसाब से कम मतदान के प्रभाव का आंकलन कर रहे है । इस बार के चुनाव मे जहाँ उम्मीदवार आम जनता के बीच मुद्दों को ले जाने मे नाकामयाब रहे वही , । मोदी फैक्टर का आंशिक असर भी देखा गया , यद्यपि मोदी फैक्टर  2014 , व 2019 के चुनाव की तरह नही है किन्तु मोदी का असर अभी भी मतदाताओं मे है । मुद्दों का जनता के बीच ना पहुचाने  के पीछे मीड़िया का एकतरफा प्रचार भी कारण रहा है , । दस वर्ष तक लगाकार सत्ता मे रहने के बाद भी सरकार अपनी उपलब्धियों को बताकर बोट मांगने के बजाय बिपक्षी पार्टियों की नाकामियों को ही मुद्दा बनाती रही है । यद्यपि इस चुनाव में उत्तराखण्ड के बिपक्षी दल सरकार के खिलाफ ब्याप्त असन्तोष को भुनाने मे पूरी ताकत के साथ  कामयाब नही हो सके है किन्तु मतदान कम होने के बाद भी सत्ताधारी दल को कितना नुकसान या फायदा होगा ,इसका आंकलन तो ई वी एम व बी बी पैड की गिनती पर ही स्पष्ट होगा । किन्तु यह चुनाव राजनैतिक दलों के उपर प्रश्न तो छोड़ता ही है ।

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