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अल्मोड़ा द्वाराहाट अल्मोड़ा ,जनपद का वह दिब्य स्थल है जो मन्दिरों के नगर के रूप मे विख्यात है ,यह प्रदेश व देश में उत्तर द्वारिका के नाम से प्रसिद्ध,है ।यद्यपि इन दिनो लोग हरिद्वार से उत्तराखंड के चार धाम यात्रा का शुभारम्भ करते है ,किन्तु कुमाऊ से जाने वाले लोगों के लिये ( द्वाराहाट ) से ही लोगों को अपनी विरासतों की समृद्धि के दर्शन करते हुवे चारधाम जाने का सौभाग्य प्राप्त होता है यहां  द्वाराहाट के पुरातात्विक महत्व के 55 है जिन्हें   देखने  का   अवसर यात्रियों को प्राप्त होता है। यात्री चाहे तो द्वाराहाट मे रूक कर दर्शन का  सौभाग्य प्राप्त कर सकते है। द्वाराहाट के इन मन्दिरों को देखे बिना द्वाराहाट की सम्पन्न बिरासत को समझना कठिन है । द्वाराहाट को कुछ समय के लिए कत्यूरी राजाओं की राजधानी बनने का सौभाग्य द प्राप्त हुआ था। ये मन्दिर दसवीं से बारहवीं शताब्दी के आसपास बने हुए है जो आज भी अपनी छटा बिखेरते हैं और आगंतुकों को अपनी ओर आकर्षित करते हैं। मन्दिरों की बनावट को देखते हुए उन्हें तीन या चार प्रकार की श्रेणी में बांटा जा सकता है। जिस कत्यूरी राजा के शासन काल में जिस मन्दिर का निर्माण किया गया उसको उस प्रकार की श्रेणी में रखा जाता है। इनमें सबसे भव्य और कलात्मक ढंग से सजाया और संवारा गया मन्दिर गुर्जर मन्दिर है जो राजा गुर्जर देव के शासन काल में बनाया गया ।
इन मन्दिरों में से केवल मृत्युंजय मन्दिर और बद्रीनाथ मंदिर में पूजा अर्चना होती है। अन्य मन्दिर विग्रह या शिव लिंग रहित हैं। उनमें पूजा अर्चना नहीं होती। बद्रीनाथ मंदिर में विग्रह मन्दिर निर्माण काल का नहीं है। यहां उपेक्षित घरोबरों के सुरक्षित संरक्षण के लिये
एक संग्रहालय बनाने की आवश्यकता है ।जहां खण्डित मूर्तियों और मन्दिरों के नक्काशीदार भग्नावशेषों को उनके विवरण सहित लोगों के दर्शनार्थ रखा जा सके।
आशा है द्वाराहाट की जागरूक जनता इस ओर ध्यान देगी। यदि इस ओर ध्यान दिया गया तो यह पर्यटकों को आकर्षित करने  का प्रमुख केन्द्र बन सकता है । मानसखण्ड कैरिडोर मे प्रमुख भूमिका निभा सकता है ।

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