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आल इण्ड़िया मोटर काग्रेस ने मोदी सरकार के नये मोटर वाहन एक्ट का ऐसा बिरोध किया कि सरकार के हाथ -पाव फूल गये , सरकार को आल इण्ड़िया मोटर काग्रेस को यह लिख कर देना पड़ा कि सरकार अभी इस कानून को लागू नही कर रही जब भी कानून लागू होगा उससे पहले आल इण्डिया मोटर काग्रेस की बातें सुनी जायेगी , आरम्भ मे इस कानून का बिरोध ट्रक एसोसियेशमों ने किया किन्तु जब इसमे बस ड्राईवर व टैक्सी चालक भी जुड़ गये तो हडताल का दायरा ब्यापक हो गया , देश भर के पेच्रोल पम्पों मे पेट्रोल व डीजल की भारी कमी हो गई , ज्यों ही अस्सी लाख ट्रकों के पहिये जाम होने लगे तो सरकार हरकत मे आ गई , आनन -फानन मे आल इण्डिया मोटर काग्रेॊ के प्रतिनिधियों से बात की गई , तथा उनसे हड़ताल समाप्त करने की अपील की गई , सरकार की तरफ से उन्हें आस्वासन दिया गया कि सरकार फिलहाल नये वाहन एक्ट रन एण्ड हिट को लागू नही कर रही है इसंे जो खामिया है उन्हें सरकार आल इण्ड़िया मोटर काग्रेस से वार्ता के बाद संज्ञान लेगी इस लिखित आस्वासन के बाद आल इण्ड़िया मोटर काग्रेस ने अपनी हडताल वापस ले ली , । अल्प काल की हड़ताल से ही देश मे दैनिक उपयोग की वस्तुओं की किल्लत होने लगी ,। सरकार को चालकों की इस एकजुटता का अंदाजा नही था , किन्तु डैमेज कम्ट्रोल के तौर पर सरकार ने जो तत्परता दिखाई उसका लाभ सरकार को जरूर मिलेगा । देखिये भारत सरकार ने अपने आदेश में कहा है कि भारतीय दण्ड़ संहिता की धारा 106(2) में दस साल की सजा व जुर्माने के प्रावधान पर वह चालको की चिन्ता का संज्ञान ले रही है , देखिये और क्या कहा ?

चालकों की इस हडताल की चर्चा आम जनमानस मे भी बड़ी तेजी से होने लगी , जिससे सरकार बैक फुट मे आ गई ।

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