Loading

इतिहास मे पहली बार ऐसा माहौल उत्पन्न हो रहा है जब लोकसभा 2024 के चुनाव को लेकर मतदाता खामोश है ,। राजनैतिक दलों को उत्साही कार्यकर्ता  नही मिल रही है , । जो दलबदल कर  पार्टियों मे शामिल हो रहे है वह भू पिटे मोहरे ही शाबित हो रहे है ।

मतदाताओं की खामोशी को लेकर चुनावी विशेषज्ञ भी अपनी राय नही बना पा रहे है । टी बी पर इस सम्बन्ध मे जो डिवेट चल रही है उसमे  भी राजनैतिक बिष्लेषक जो संम्भावना ब्यक्त कर रहे है उसका आधार पिछला लोकसभा चुनाव है ।

पिछले लोकसभा चुनाव मे प्रधानमन्त्री नरेन्द्र मोदी एक स्टार प्रचारक के रूप मे सबसे लोकप्रिय नेता के रूप मे उभरे थे , । हिन्दुत्व की लहर भी थी , इस चुनाव मे भी प्रधानमन्त्री नरेन्द्र मोदी के नाम पर ही बोट मांगे जा रहे है , । वही बिपक्षी खेमे मे इण्ड़िया गठबन्धन क्या असर दिखायेगा यह अभी स्पष्ठ नही है काग्रेस ने जो जातीय जनगणना का सिगूफा छोड़ा है वह भी कोई लहर पैदा नही कर  पा रहा है ।इस बार का  चुनाव मोदी सरकार की अग्नि परिक्षा है तो बिपक्षी गठबन्धन का लिटमस  टैस्ट , । समाज मे यह धारणा आम धारणा है कि बी जे पी एक संगठित पार्टी है , ।पर काग्रेस को बी जे पी भी हल्के तौर पर नही ले रही , राहुल गाँधी द्वारा पिछले दिनों देश मे जो पदयात्रायें की उससे काफी हद तक राहुल गांधी की छवि मे सुधार हुवा है ।

इस सब के बीच पहाड़ों का एक -एक बोटर तक राजनेता अपने संगठन के बलबूते भलेहि पहुच बना चुके हो पर आम जनता अभी मुह खोलने के मूठ मे नही आया है , यह देखकर राजनैतिक पार्टियां असमंजस  मे है ।

Author

Leave a Reply

Your email address will not be published.