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इस वर्ष पत्रकार उमेश डोभाल स्मृति समारोह नई टिहरी के चमियाला में हो रहा है , यहाँ फलिन्ड़ा में नदी जल परियोजना से स्थानीय वाशिन्दों को उनके हक – हकूक दिलाने के लिये हम लोंगों ने उत्तराखण्ड़ लोक वाहिनी के अध्यक्ष रहे, शमशेर सिह विष्ट के नेतृत्व मे पुलिस के सख्त पहरे मे एक कठिन यात्रा की थी , इस वर्ष जन सरोकारों के लिये अतुल सती को सम्मानित किया जा रहा है । उमेश डोभाल की जब शराब माफियाओं ने हत्या की थी , तो बताया जाता है कि पौढी की सड़को मे डर के मारे सन्नाटा छा गया था , कथित हत्यारे मनमोहन ने इसे जातीय रंग देने की कोशिस की थी ,तब अल्मोड़ा से डा . शमशेर सिह बिष्ट के नेतृत्व मे पौढी मे इस हत्या काण्ड़ का बिरोध करने एक दल गया ,था ,डा बिष्ट के नेतृत्व मे इस दल ने पौढी मे जब नारे लगाये तो स्थानीय स्तर पर राजू रावत , ओमकार बहुगुणा , रमेश पहाडी आदि लोगों का उन्हें साथ मिला देखते -देखते हजारों लोगो का हुजूम उमड़ पड़ा था , उमेश डोभाल , राजू रावत, गिर्दा को इस कार्यक्रम में याद किया जाता है , पर उत्तराखण्ड़ मे जन आन्दोलनों की परम्परा को विकसित करने वाले ड़ा शमशेर सिंह बिष्ट ठीक उसी प्रकार भुला दिये गये ,जैसे बामपन्थी चेतना में पी सी जोशी , धार्मिक पाखण्डवाद के विकास की चेतना विकसित करने में आर्य समाज , व साहित्यिक चेतना व आजादी की लड़ाई मे शालम व सल्ट क्रान्ति विकसित करने वाले सत्यदेव परिब्राजक , पाखण्ड़ व धार्मिक कट्टरता के खिलाफ बलिदान देने वाले स्वामी अग्निवेश , आदि

यदि देखा जाय तो डा शमशेर सिंह बिष्ट जैसा वनआन्दोलनकारी , राज्य आन्दोलनकारी , नशा विरोधी ,मैग्मेसाईट ,कोटखर्रा , विश्वविद्यालय आन्दोलनकारी , बाध विरोधी आन्दोलनकारी , पहाड़ का चितेरा ,कुछ ही सालों में भुला दिया जाय तो आश्चर्य कैसा , यह तो होता आया है । हमें भी चमियाला जामा था , पर हममे सबसे अधिक समय डा शमशेर सिंह बिष्ट , स्वामी अग्निनेश बनवारी लाल शर्मा के साथ बिताया जब ऐसे कार्यक्रमों में इन्हे भुला दिया जाय तो , लगता है जाकर भी क्या होगा ।, एक वर्ष फिर से यों ही बीत जायेगा , फिर अगले साल उमेश डोभाल को याद किया जायेगा , यदि सब कुछ ठीक रहा तो फिर जा सकते है ।

पर चमियाला में जो कार्यक्रम हो रहा है उसमें अतुल सती का होना सकून देता है । वे जोशीमठ के लिये लड़ रहे है उन्हें देखकर शमशेर सिंह निष्ट की अखरती कमी कुछ सकून देती है कि अभी भी अतुल सती , पी सी तिवारी आवाज तो उठा रहे है ।

किसी भी विचारधारा को आगे बढाने के लिये संघर्ष व विचारधारा का होना जरूरी है उमेश डोभाल अपने समय मे नशा मुक्त उत्तराखण्ड़ की अवधारणा है , तो डा शमशेर सिह बिष्ट राज्य की आवाज .।

31वें उमेश डोभाल समारोह में अतुल सती, जगदीश नेगी, जगदीश भौर्याल, जयदीप सकलानी, हिमांशु जोशी और कमलेश भट्टको अलग -अलग क्षेत्रों मे उनके योगदान के लिये पुरुष्कृत किया गया

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