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पूर्व मुख्यमन्त्री तीरथ सिंह रावत के प्रदेश में ब्याप्त कमिशनखोरी पर दिये गये एक बयान से राजनीति मे भूचाल आ गया है । तीरथ सिंह रावत ने सरकारी विभागों मे ब्याप्त कमिशनखोरी पर सवाल उठाते हुवे कहा है कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि प्रदेश मे विना परसैन्ट दिये कोई काम नही होता तीरथ सिंह के इस बयान को काग्रेस ने लपक लिया है काग्रेस इस बयान को लेकर अब बी जे पी को घेर रही है काग्रेस ने कहा है कि सरकार शीर्ष स्तर पर इस भ्रष्टाचार को रोके तीरथ सिंह रावत ने कहा था कि जब वे सी एम बने के उन्होंने कहा था कि हमें उत्तर प्रदेश की कमिशन खोरी की प्रबृति का त्याग कर उक्तराखण्ड मे जीरो कर देना चाहिये । लेकिन दुर्भाग्य यह रहा कि जब उत्तर प्रदेश के समय जीरो से लेकर 20 तक परसेंटेज आता था जिस पर रोक लगाने की आवश्यकता थी

तीरथ सिंह रावत ने कहा उत्तराखंड बनने के बाद हमें कमीशन को लेकर जीरो होना चाहिए था लेकिन उत्तराखण्ड मे 20% कमिशन से शुरुवात हुई भ्रष्टाचार की इस मानसिकता को बदलना होगा । तीरथ मे कहा कि कमिशन खोरी मे अधिकारी तो दण्ड़ित होते है पर जनप्रतिनिधि साफ बच जाते है अब दोनो को मिलकर सोचना होगा ।

काग्रेस ने तीरथ के बयान का समर्थन करते हुवे कहा है कि इसके लिये शीर्ष स्तर पर पहल होनी चाहिये ।

यदि देखा जाय तो सरकार ने निर्माण कार्यों की दरों मे कोई खास बृद्धि नही की है। बर्तमान में ठेकेदारो के बीच प्रतियोगिता मे ठेके दार यदि निर्धारित दरों से कम मे टैन्डर डाल रहे है तो उन्हे इस राशि पर 18% जी एस टी 10 % अपना लाभांस , 20% कमिशन(तीरथ सिंह के अनुसार ) सैल टैक्स आदि 4% प्रतिशत इस प्रकार कटौती लगभग 50% से अधिक हो जाती है ठेकेदार को निर्माण सूचना मे पूरू राशि दप्शानी होती है ऐसे मे निर्माण कार्यों मे गुणवक्ता का रहना व ठेकेदार का सामाजिक साख बचाना कठिन है ।

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