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सच मे आज उन आध्यात्मिक गुरुओं के लिये बड़ा संकट है , जिन्होंने धर्म व आध्यात्म के मार्ग मे अपने को खपा दिया ,। समाज मे अब धार्मिक मामलों मे भी नेता बाजी मारने लगे है । हाल ही मे राजनेताओं द्वारा रामचरित मानस पर जो विवादित बक्तब्य दिये गये उनसे ज्यादातर लोग परिचित है , इन नेताओ का धार्मिक ज्ञान भी अद्भुत है ,ये धर्म शास्त्र के उन प्रसंगों को उठा कर समाज को भ्रमित करते है जिसका संम्बन्ध प्रसंगानुसार पात्रता के आधार पर आता है ।

इन दिनो भलेहि देश मे शंकराचार्य जैसे शास्त्र निपुण बिद्वान हो , अग्निबृत नैष्ठिक जैसे वेद वैज्ञानिक हो पर इन बिद्वानों के लिये मीडिया के पास मन्च उपलब्ध नही है । किन्तु नेता विवादित प्रसंग उठाते रहते है , ।वे धार्मिक प्रसंगों मे भी मीड़िया की सुर्खिया बटोर लेते है , देश में बौद्धिक सम्पदा का हनन निरन्तर होता जा रहा है , अब तो परिवार नियोजन की तरफ आगे बढने वाले लोगों को चुनौतियां मिलने लगी है , देश मे एक नारा प्रमुखता से उठाया जा रहा है ,जिसमें कहा जा रहा है कि जिसकी जितनी संख्या भारी उसकी उतनी हिस्सेदारी , जिन्होंने देश में जनसंख्या विस्फोट को अंजाम दिया वे अब अपनी जनसंख्या के आधार पर अपने लिये हिस्सेदारी मांग रहे है , जबकि जिन्होंने देश मे जनसंख्या बढाकर देश के संसाधनों पर डाका डाला अब वे उन्हें चुनौती दे रहे है ,जिन्होने जनसंख्या को नियंन्त्रित करने का काम किया ,।

नेतागण जो ना कराये वह कम है , बी पी सिंह द्वारा बन्द बोतल से निकाला गया ओ बी सी आरक्षण का जिन्न अब सवर्ण समाज को निगलने के बाद दलित समाज को भी निगलने के कगार पर है ,। ओ वी सी के नेता देश मे यह मानस बनाने लगे है कि वह शूद्र है , उनकी नजर अब दलित बोट बैंक पर ही नही बल्कि दलितों के लिये निर्धारित आरक्षण पर भी लग गई है , देश की संसद मे विधान सभाओं मे आरक्षित दलित सीटो पर ओ बी सी समाज की अगड़ी जातिया अपने को शूद्र घोषित करवा कर यदि कब्जा करवा ले तो कोई आश्चर्य नही , ।

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