Loading

जिन रामलला को दशको से पहले विवादित ढाचें मे फिर टैन्ट में पूजा जाता रहा वे प्रतिष्ठित विग्रहमूर्ति स्वयंप्रकट भगवान् “रामलला”की प्रतिमा का स्थान नई प्रतिमा लेने जा रही है, नई प्रतिमा सोसियल मीड़िया में वाईरल हो रही है । ऐसे मे एक बार फिर जगदगुरु शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानन्द ने , मन्दिर ट्रस्ट को पत्र लिखकर आपत्ति दर्ज करा दी है उनका कहना है कि रामलला विराजमान अपनी जगह के लिए अपने सखाओं द्वारा खुद कोर्ट में लड़े, जिनके हित ,हक व मूल स्थान के लिए साधुसंत शंकराचार्य जी व उनके शिष्य, उनके वकील लड़े और उन्होंने जिस जन्म भूमि को स्वतंत्र कराया गया ।आज उन्हीं भगवान रामलला” को चल मूर्ति का दर्जा करके दोयम दर्जा कर दिया जा रहा? यह उचित नही है । अब न्यायालय मे मुकदमा जीतकर आये रामलला के बिग्रह को उल्टा ‘चल मूर्ति’ का दोयम दर्जा क्यों,दिया जा रहा है ।


सनातन धर्म अपने मौलिक अवशेषों को प्रतिष्ठित करता है अब कुछ सन्यासी जहा मूल बिग्रह को मुख्य मन्दिर मे बनाये रखने की आवाज उठा रहे है तो कुछ इस बात से बहुत खुश है कि देश मे 22जनवरी को राम मन्दिर मे नई मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा होगी ,मूल “रामलला विराजमान” का क्या होगा इस पर ट्रष्ट के एक पदाधिकारी का कहना है अब मुख्य स्थान मे नई प्रतिमा होगी , न्यायालय से मुकदमा जीतने वाली मूर्ति वहां किसी स्थान मे रख दी जायेगी जिस पर सवाल उठाते हुवे लोग कह रहे है कि एकमात्र प्रमुख देवविग्रह रामलला बिराजमान है । उसका स्थान कोई मूर्ति नही ले सकती बाकी जो चाहे, कहीं किसी और जगह सौ फीट हजार फिट बड़ी , करोड़ों की मूर्ति लगा लें, उससे हमें मतलब नहीं। किन्तु मूल मन्दिर मे रामलला बिराजमान ही होने चाहिये

Author

Leave a Reply

Your email address will not be published.