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अजमेर, 23 दिसंबर। महर्षि दयानंद निर्वाण स्मारक न्यास भिनाय कोठी, अजमेर में महान संत व स्वतंत्रता सेनानी स्वामी श्रद्धानंद सरस्वती के 97 वें बलिदान दिवस पर वैदिक यज्ञ व विचारगोष्ठी कार्यक्रम का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप पूर्व विधायक डॉ॰ श्रीगोपाल बाहेती ने अपना वक्तव्य रखते हुए कहा कि स्वामी श्रद्धानंद सरस्वती भारत के उन महान राष्ट्रभक्त सन्यासियों में अग्रणी थे, जिन्होंने अपना संपूर्ण जीवन स्वाधीनता, स्वराज्य, शिक्षा तथा वैदिक धर्म के प्रचार-प्रसार के लिए समर्पित किया। गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय शैक्षणिक संस्थाओं की स्थापना कर सनातन समाज व भारत को संगठित करने में उनका अतुल्य योगदान सर्वविदित है। ऐसे महापुरुषों को कृतज्ञ राष्ट्र नमन करता है। गुरुकुल काँगड़ी सहित अनेकों गुरुकुलों के संस्थापक स्वामी श्रद्धानंद सरस्वती महाराज ने ही सर्वप्रथम गांधी जी को “महात्मा” की उपाधि से विभूषित किया। भारत की स्वाधीनता के लिए प्रत्येक नागरिक को पांथिक मतभेद भुलाकर एकजुट होने का आह्वान किया। आजादी के आंदोलन व राष्ट्र निर्माण में स्वामी जी का अविस्मरणीय योगदान याद रहेगा, शिक्षा के क्षेत्र में स्वामी जी ने एक नई क्रांति कर गुरुकुलीय शिक्षा का ढाँचा देश को दिया जिसने कई क्रांतिवीर पैदा किए और स्वामी श्रद्धानंद सरस्वती महाराज का बलिदान दिवस देश के प्रत्येक युवा के लिए प्रेरणा का दिवस है। स्वामी श्रद्धानंद ने धर्म में व्याप्त अंधविश्वास, जाति प्रथा का प्रबल विरोध कर समाज को एक नई दिशा प्रदान की और सामाजिक परिवर्तन के सूत्रधार बने। परंपरागत शिक्षा पद्धति के अनुरूप नए रूप में गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय की स्थापना कर उन्होंने भारतीय संस्कृति को विश्व भर में जागृत किया। राष्ट्र की एकता अखंडता बनाए रखने में उनका अहम योगदान कभी भुलाया नहीं जा सकता। इस अवसर पर पंडित रामस्वरूप व गिरधारीलाल अरड़का ने भी अपने विचार रखे और पुष्पा क्षेत्रपाल ने एक भजन प्रस्तुत किया ।
विचार गोष्ठी से पूर्व आचार्य जागेश्वर निर्मल के ब्रह्मत्व में वैदिक यज्ञ कर कार्यक्रम की शुरुआत की जिसमें गिरधारी लाल अरड़का, प्रकाश किशोर खन्ना व पुष्पा क्षेत्रपाल यजमान रहे।
कार्यक्रम में चंद्रप्रकाश भटनागर, सेठ गुलाब चंद खंडेलवाल, डॉ॰ जयदेव आर्य, जय सिंह खंगारोत, जय गोयल, पूरणचंद राजोरिया, सत्यनारायण शर्मा, गोविंद शर्मा, मुकेश कुमार माहेश्वरी, दिलीप चैहान, नाथू सिंह, राजू मास्टर, राकेश खन्ना, सुनील ओलानियाँ, हनुमान शर्मा व सुरेश राठौर सहित अनेक आर्यजन उपस्थित रहे । कार्यक्रम का संचालन राहुल आर्य ने किया ।

अल्मोड़ा में भी याद किये गये स्वामी श्रद्धानन्द

अल्मोड़ा स्वामी श्रद्धानन्द की बलिदान दिवस पर आर्य संमाज अल्मोड़ा मे मन्त्री दयाकृष्ण काण्डपाल मे कहा कि देश की आजादी से लेकर शुद्धि आन्दोलन मे उनकी भूमिका अतुलनीय है , इस अवसर पर याद किया , वे गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय के संस्थापक रहे इसकी स्थापना के लिये उम्होंने अपनी पैत्रिक सम्पत्ति तक बेच डाली अपने दो पुत्रों को लेकर इन्होंने गुरुकुल विश्वविद्यालय की स्थापना की स्वामी श्रद्धानन्द पहले ब्यक्ति थे जिन्होंने सनातन धर्म छोड़ चुके लोगों के लिये समातन मे वापसी के दरवाजे खोले , इसके लिये उन्हे आलोचनाओं का शिकार बनना पड़ा , तथा अपना बलिदान भी देना पड़ा अल्मोड़ा मे धर्म जागरण संिति व बिक्टोरिया क्लब मे उनकी जयन्ती, पर रक्तदान शिविर आयोजित किया ।

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