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अल्मोड़ा: यहां जिलाचिकित्सालय में बीते दो रोज पूर्व 5 साल के मासूम असहल को वरिष्ठ शल्य चिकित्सक डॉ अमित सुकोटी ने नया जीवन दिया। नेपाली मूल के इस बच्चे को एक गंभीर बीमारी थी और व आर्थिक से अत्यंत गरीब था। आयुष्मान कार्ड जैसी किसी सुविधा से वंचित इस परिवार को सर्जन अमित ने करूणा भाव से भर्ती किया और उसकी बीमारी की गंभीरता को समझा और उसका ऑपरेशन करने का बीड़ा उठाया।बच्चे का जन्म जात दांया अण्डाशय गायब था और उसकी नली भी बाधित थी। जिसे मोनोरचिजम या शुक्राणु रज्जू का हाइड्रोसील कहा जाता है , जिसमें बच्चे को एक जटिल इनग्यूनल हर्निया भी था। रेडियोलॉजिस्ट डॉ मोहित टम्टा जी ने अल्ट्रासाउण्ड के द्वारा इसका पता लगाया। इस प्रकार की जटिलता का उपचार पर्वतीय जनपदों में कोई सोच भी नहीं सकता। इस निर्धन श्रमिक नेपाली परिवार की दयनीय स्थिति ने सर्जन को हृदय को द्रवित किया और उन्होंने सफलतापूर्वक कर दिखाया। उन्होंने अपनी टीम के साथ मात्र 3.5 इंच के कटाव के साथ बिना खून की हानि पहुंचाए बच्चे का ऑपरेशन किया और बच्चा बीते दो दिन से स्वस्थ है। इस कार्य में निश्चेतक चिकित्सक डॉ पल्लवी चौहान, स्टाफ नर्स नेहा, प्रियंका, ओटी स्टाफ गणेश और वार्डबॉय धर्मेंद्र ने उनका सहयोग किया। निर्धन नेपाली परिवार सहित वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारियों ने इस पूरी टीम और शल्य चिकित्सक डॉ अमित सुकोटी को इस जटिल शल्य को सफलता पूर्वक करने के लिए बधाईयां दी है। नेपाली सनजू सिंह और उनकी पत्नी हीरा मूल रूप से धनगढ़ी फूलबाड़ी नेपाल के निवासी हैं उनकी पत्नी भी बीमार है और वर्तमान में हवालबाग में मेहनत मजदूरी कर अपना परिवार पालते हैं। पिछले 8 सालों से भी अधिक वर्षों का अनुभव रखने वाले डॉ अमित मुख्य रूप से लैप्रोस्कोपिक सर्जरी में दक्ष हैं। उनका कहना है कि अभी तो हम अस्थाई ओटी चला रहे हैं। लगभग 6 माह बाद हमें स्थाई ऑपरेशन थ्येटर तो अल्मोड़ा में दूरबीन से ऑपरेशन की सुविधा संभव है। बच्चे के परिजन तीन चार रोज में उसे घरले जाएंगे। डॉ अमित ने बताया कि खानपान की अच्छी आदतों के साथ बच्चा एकल अण्डकोष के सहारे सामान्य जीवन जी सकता है और संतान उत्पत्ति में भी कोई प्रभाव नहीं पड़ता। उन्होंने बताया कि यह बीमारी दुर्लभ है और करोड़ों लोगों के बीच 2 से 3 प्रतिशत को लोगों को जन्मजात इस प्रकार की जटिलताएं आती है। डॉ अमित द्वारा एक निर्धन परिवार के प्रति संवेदनशीलता और उनके बच्चे को जीवनदान देने का मामला नगर में चर्चाओं में है और सामाजिक कार्यकर्ता भुवन जोशी, संजय पांण्डे,हरेन्द्र वर्मा, सहित अनेक लोगों ने उन्हें शुभकामनाएं दी और कहा कि इस प्रकार के जुनूनी चिकित्सक ही पहाड़ की चिकित्सा व्यवस्था को चाहिए जिन्होंने स्थाई ओटी न होने के बाद भी यह कार्य किया । ज्ञात हुआ कि इससे पूर्व भी हल्द्वानी से आर्थिक तंगी के कारण उपचार से वंचित लौटे शहरफाटक निवासी एक ऊतक संक्रमण से प्रभावित बच्चे के पैर का भी अपने खर्चे से डॉ अमित ने सफल ऑपरेशन कर उसे ठीक किया जो प्रकाश में नहीं आया। चिकित्सालय के पीएमएस डॉ एच0सी0 गड़कोटी सहित जनपदीय अधिकारियों ने डॉ अमित को बधाई दी है। सामाजिक कार्यकर्ता संजय पांण्डे ने कहा कि ये अल्मोड़े के लिए सौभाग्य की बात है कि इतने काबिल सर्जन अल्मोड़ा में है जो निस्वार्थ भाव से लोगो की सेवा में लगे है उन्होंने सभी स्वयं सेवी संस्थाओं अस्पताल प्रबंधन एव जिला प्रशासन से डॉ अमित को इस कार्य के लिए पुरस्कृत करने की भी मांग की।

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