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अपने महत्वपूर्ण फैसले मे सुप्रीम कोर्ट ने राजनैतिक पार्टियो को दिये जा रहे चुनावी बौन्ड यनि गुप्त चन्दे पर रोक लगा दी है चुनावी बान्ड को कोर्ट ने असंवैधानिक बताया है ।और इस नीति को रद्द कर दिया है, सुप्रिम कोर्ट के फैसले से बी जे पी को चन्दा देने वाले उन समुहों को भी बड़ा झटका लगा है , जिन्हें यह गारन्टी दी गई थी कि उनका नाम गोपनीय रखा जायेगा ।अभी देश मे सबसे अधिक बौन्ड के जरिये चन्दा लेने वाली पार्टी बी जे पी है इस पार्टी को काग्रेस की तूलना मे दस गुना अधिक चन्दा मिला है , यह योजना आर टी आई के दायरे से बाहर रखी गई थी जिस पर कोर्ट का कहना था कि चुनाव बॉन्ड की योजना सूचना के अधिकार (RTI) के खिलाफ है।कोर्ट ने चुनाव आयोग से कहा कि वो 2019 से अब तक की जानकारी तलब करे।बॉन्ड जारी करने वाले एसबीआई को यह जानकारी देनी होगी कि अप्रैल 2019 से लेकर अब तक कितने लोगों ने कितने-कितने रुपए के चुनावी बॉन्ड खरीदे। एसबीआई तीन हफ्ते में यह जानकारी देगी।उसके बाद चुनाव आयोग जनता तक यह जानकारी पहुंचाएगा

दरअसल, चुनावी बॉन्ड को सरकार ने आरटीआई के दायरे से बाहर रखा है. यानी आम जनता आरटीआई के तहत चुनावी बॉन्ड से संबंधित जानकारी नहीं मांग सकती है। जबकि कोर्ट ने अपने फैसले में कहा, वोटर्स का हक है कि वो पार्टियों के फंड के बारे में जानकारी रखें। चुनाव आयोग को भी इलेक्टोरल बॉन्ड से संबंधित जानकारी बेवसाइट पर देनी होगी।सरकार की दलील थी कि इलेक्टोरल बॉन्ड के जरिए पॉलिटिकल फंडिंग में ब्लैक मनी और गड़बड़झाला रुक सकेगा।जबकि कोर्ट ने कहा, काला धन रोकने के दूसरे रास्ते भी हैं।
चुनावी बान्ड चुनावो के लिये धन एकत्र करने की योजना है , इस योजना से देश के सत्ताधारी पार्टी बी जे पी सबसे अमीर पार्टी के रूप मे सामने आई है ।आंकड़ा कांग्रेस को मिले दान से कहीं दस गुना ज्यादा है. साल 2022-23 के दौरान बीजेपी को करीब साढ़े सात सौ करोड़ का चुनावी चंदा मिला था।बीजेपी ने खुद भी बताया है कि 7,945 करोड के दान मे से 719.858 करोड़ रुपये मिले यह दान काग्रेस पार्टी की तूलना मे दस गुना अधिक है । जब चुनावी बान्ड जारी किया गया तब केन्द्र मे संसद मे पारित कानून मे दानदाताओं को यह गारन्टी दी थी कि दानदाताओं के नाम नाम सार्वजनिक नही होंगे । इस सम्बन्ध मे तमाम मीड़िया प्रकाशमों द्वारा प्रकाशित की गई सूचना के अनुसार अब सुप्रिम कोर्ट ने चुनाव बौन्ड जारी करने वाले बैंक एस बी आई को यह आदेश दिये है कि वह इसका ब्यौरा चुनाव आयोग के दे , चुनाव आयोग इसे अपने बेबसाईट मे सार्वजनिक करेगा ।

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