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उत्तराखंड की मुख्य सचिव राधा रतूड़ी ने अपना कार्यभार सभालते ही जो महत्वपूर्ण फरमान जारी किया है उससे गर्भवती महिलाओं को राहत मिलने जा रही है उन्होंने राज्य में गर्भवती महिलाओं की समस्याओं को शीर्ष प्राथमिकता पर लिया है। पहली बैठक में ही प्रदेश की पहली महिला मुख्य सचिव राधा रतूड़ी ने स्वास्थ्य विभाग और सभी जिलाधिकारियों के साथ गर्भवती महिलाओं की चुनौतियों और समस्याओं की समीक्षा की। उन्होने निर्देश दिए, गर्भावस्था व प्रसव के दौरान होने वाली मौत का डेथ ऑडिट का सख्ती से पालन किया जाएगा। उनके इस फरमान से लापरवाह चिकित्सकों मे प्रभाव पडना तय है उन्होंने कहा है कि उच्च जोखिम प्रसव के लिए आपसी समन्वय बनाने को लेकर जल्द ही एसओपी तैयार की जाएगी। सचिवालय में हुई बैठक में मुख्य सचिव ने उच्च जोखिम प्रसव को चिह्नित कर स्वास्थ्य का नियमित फॉलोअप करने की कार्ययोजना पर गंभीरता से कार्य करने के निर्देश दिए। उनके इस आगेश से गर्भनती महिलाओं व उनके परिजनों में आशा की उम्मीद जगी है उन्होंने आपातकालीन 108 एंबुलेंस सेवा में पुराने वाहनों को बदलने के निर्देश दिए।जिससे वाहनों का कही पर भी खराब होने के जोखिम कम होंगे ।
उन्होने गर्भवती महिलाओं को सरकारी योजनाओं के माध्यम से दिए जाने वाले पोषाहार की रैंडम सैंपलिंग कर गुणवत्ता की जांच करने को कहा। प्रदेशभर में संचालित 109 डिलीवरी केंद्राें में उपकरणों और मानव संसाधनों की बेहतर व्यवस्था होनी चाहिए। रतूड़ी ने सभी डीएम को जिलों में होने वाली किसी भी गर्भवती महिला की गर्भावस्था या प्रसव के दौरान मौत का मेटरनल डेथ ऑडिट व्यवस्था का सख्ती से पालन के निर्देश दिए।

सभी जिलों से शीघ्र आंकड़े स्वास्थ्य विभाग को उपलब्ध कराकर प्रत्येक मातृ मृत्यु प्रकरण का अलग-अलग अध्ययन किया जाए। उन्होंने सख्त हिदायत दी कि जिला स्तर पर सभी गर्भवती महिलाओं का पंजीकरण, नियमित प्रसवपूर्व जांच रिकॉर्ड रखा जाए। इसके लिए आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षण दिया जाए। अफसरों ने बताया, प्रदेश में 82 प्रतिशत महिलाओं की प्रसवपूर्व जांच की जा रही है।

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