यदि पोता अपराध करें तो क्या दादा का घर तोड़ देना चाहिये । आदिवासी पीड़ित ने कहा अब उसे छोड दिया जाय

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देश मे त्वरित न्याय का एक नया माडल बिकसित हो गया है , उत्तर प्रदेश उत्तराखण्ड से होता हुवा त्वरित न्याय का माडल अब मध्य प्रदेश पहुच गया है । इस त्वरित न्याय के  पक्ष व बिपक्ष मे लोगों के अपने – अपने तर्क है , ।

मध्य प्रदेश में एक आदिवासी युवक पर  पूर्व बी जे पी नेता द्वारा   प्रवेश शुक्ला द्वारा जो सरेआम पेशाब की गई उस पर शिवराज सरकार द्वारा जो कार्यवाही की गई ,शुक्ला ने इसकी कल्पना तक नही की होगी , प्रवेश शुक्ला पर रा सु का समेत कई धाराओं मे मुकदमा दर्द कर उसे गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है , मध्य प्रदेश की ब्राह्मण महासभा ने प्रवेश शुक्ला के कुकृत्य की कड़ी निन्दा की है साथ ही सरकार पर सवाल किये है कि प्रवेश शुक्ला पर कार्यवाही का वे समर्थन करते है पर प्रवेश शुक्ला के दादा दादी द्वारा बनाया गया घर गिरा देना बिधि सम्मत नही है , मीड़िया खबरों के अनुसार ब्राह्मण सभा ने सरकार द्वारा घर गिराकर बेघर कर दिये गये बुजुर्गों का आर्थिक सहयोग किया है , साथ ही सरकार पर सवाल दागे है कि अपराधी के अपराध की सजा पूरे खानदान व परिवार को देना कहां तक सही है ।

अब इस प्रकरण पर पीड़ित आदिवासी ने बयान दिया है कि प्रवेश शुक्ला को उसके कृकृत्य की सजा मिल चुकी है अब उसे छोड़ दुया जाय इस प्रकरण में पीड़ित ने शिवराज सरकार की तारीफ करते हुवे रहा कि सरकार उनके हांव मे सड़क भी डलवा दे ,