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अल्मोड़ा अन्तर्राष्ट्रीय मानवाधिकार दिवस पर शिक्षा संकाय मे सेमिनार आयोजित हुईं ।


सोबन सिंह जीना विश्वविद्यालय के शिक्षा संकाय में अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार दिवस के अवसर पर चेंजिंग डाइमेंशंस ऑफ़ वीमेन वर्ल्ड सोशियल, साइकोलॉजिकल, एजुकेशनल एंड ह्यूमन राइट विषय पर एक दिवसीय राष्ट्रीय सेमिनार का आयोजन किया गया।
रविवार को शिक्षा संकाय के सभागार में लक्ष्मी देवी टम्टा महिला अध्ययन एवं शोध केंद्र के तत्वावधान में आयोजित राष्ट्रीय सेमिनार का शुभारंभ परिसर निदेशक प्रो प्रवीण सिंह बिष्ट, पूर्व विभागाध्यक्ष प्रो विजयरानी ढोडियाल, शिक्षा संकाय की विभागाध्यक्ष प्रो भीमा मनराल और महिला आयोग की पूर्व उपाध्यक्ष ज्योति साह मिश्रा ने दीप प्रज्वलित कर किया।
सर्वप्रथम शिक्षा संकाय डीन व विभागाध्यक्ष प्रो भीमा मनराल ने सबसे पहले सेमिनार में आये अतिथियों का स्वागत कर आभार जताया। उन्होंने शिक्षा के क्षेत्र महिला के सामने आने वाली चुनोतियो पर विचार व्यक्त किये। संयुक्त राष्ट्र ने 1950 में दस दिसंबर को मानवाधिकार दिवस घोषित किया था, जिसका उद्देश्य विश्वभर के लोगों को मानवाधिकारों के महत्व के प्रति जागरूक करना और इसके पालन के प्रति सजग रहने का संदेश देना है।
मुख्य वक्ता सोबन सिंह जीना विवि की शिक्षा संकाय की पूर्व विभागाध्यक्ष प्रो विजया रानी ढोड़ियाल ने कहा कि संविधान में 64 वां संसोधन ने महिला अधिकारों की बात कही थी। जिसके बाद पंचायतों में महिला भागीदारी बढ़ी। उन्होंने महिला शोध में काम करने की जरूरत पर विशेष जोर दिया। महिला अध्यन केंद्र को जमीनी स्तर के कामों में करना होगा। उन्होंने किशोरियों के कौशल विकास पर जोर देते हुए कहा कि आज उनको काम करना चाहिये। किशोरियों को कौशल विकास पर कार्यशाला आयोजित होनी चाहिये। रुहेखण्ड विवि की प्रो आशा चौबे ने कहा कि शिक्षा महिलाओं के लिए शक्तिकरण का प्रमुख हथियार है। डिजिटल मीडिया ने आज के दिन जीवन शैली को बदल दिया है। डिजिटल युग ने महिलाओं के लिए अनेक चुनोतियाँ पेश कर दी है। डिजिटल इस्पेस के प्रति पुरूषों को संवेदनशील होना चाहिये। उन्होंने डीप फेक, डॉगसिंग ने महिलाओं की दुनियां को बदल दिया है। प्रो एनसी ढोंडियाल ने कहा कि पुरुषों को महिलाओं के बारे सोच में बदलाव लाना चाहिये। कहा कि महिलाओं ने हर क्षेत्र में लोहा मनवाया है। लेकिन आज भी महिलाओं की स्तिथि में अनेक गुंजाइश की जरूरत है। बालक और बालिका की परवरिश में बचपन से विशेष ध्यान देना चाहिये, ताकि सभी को समान अवसर दिए जाने चाहिए। महिला विकास में पुरुषत्व विचारधारा में बदलाव लाने की जरूरत पर जोर दिया। विशिष्ट अतिथि पूर्व महिला आयोग की उपाध्यक्ष ज्योति साह मिश्रा ने सरकार की ओर से चलाई जा रही योजनाओं की जानकारी दी। उन्होंने महिला शिक्षा पर सामाजिक, मनोवैज्ञानिक और शैक्षिक जरूरत पर जोर दिया। सेमिनार की अध्यक्षता करते हुए परिसर निदेशक प्रो प्रवीण बिष्ट ने कहा कि महिला और पुरुष एक सिक्के के दो पहलु है। महिलाओं को स्वालंबन के लिए शिक्षा की जोड़ने की जरूरत है। वैदिक काल में महिलाओं को स्थिति अच्छी थी। डिजिटल युग में सकारात्मक सोच के साथ आगे बढ़ाने चाहिए। कार्यक्रम का संचालन डॉ संगीता पवार ने किया। इस अवसर पर आयोजित तकनीकी सत्र में ऑनलाइन और ऑफलाइन शोध पत्र प्रस्तुत किये गए। कार्यक्रम में रूहेलखंड विश्वविद्यालय बरेली की प्रो आशा चौबे, प्रो शरद सिंहा, प्रो नीता बोरा शर्मा, प्रो रेनू प्रकाश, प्रो आराधना शुक्ला, डॉ प्रीति आर्य, प्रो जीएस नयाल, डॉ पूजा प्रकाश, डॉ रिजवाना सिद्दीकी, डॉ सोनी टम्टा, डॉ नीलम कुमारी, मंजरी तिवारी, गौहर फातिमा,अंकिता, निवेदिता साह, डॉ देवेंद्र चम्याल, रिंकी पांडे, मनदीप टम्टा, अंकिता , ललिता रावल आदि मौजूद रहे।

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