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अल्मोड़ा उत्तराखंड-संस्कृत-अकादमी हरिद्वार द्वारा आयोजित “महाकविकालिदास-जयंती मासमहोत्सव” के उपलक्ष्य में अल्मोड़ा- जनपद के राजकीय महाविद्यालय तल्ला सल्ट नेवलगांव में संस्कृत-विभाग द्वारा “महाकविकालिदासस्य ग्रन्थेषु पर्यावरणसंरक्षणचिंतम्” विषय पर ऑनलाइन संगोष्ठी का आयोजन किया गया। गोष्ठी का शुभारंभ डॉ. हिमांशु पंत के द्वारा वैदिक मंगलाचरण तथा महाविद्यालय की तृतीय सेमेस्टर की छात्रा कविता मेहरा के द्वारा लौकिक मंगलाचरण के द्वारा किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. बिश्व मोहन पांडेय ने की । गोष्ठी में मुख्य वक्ता डॉ. अरविंद कुमार तिवारी जी आ.वै. इं. कॉलेज, बागपत ने कालिदास के साहित्य में वर्णित प्रकृति का विस्तार पूर्वक वर्णन करते हुए शकुंतला के प्रकृतिप्रेम से प्रेरणा लेने की बात कही। डॉ. तिवारी ने कहा कि अभिज्ञानशाकुंतलम् में प्रकृति के उपादान वनस्पति तथा जीव-जंतुओं व रघुवंश में नंदिनी की सेवा के द्वारा जीव संरक्षण की बात कही गई है। कार्यक्रम में उपस्थित राष्ट्रपति द्वारा पुरस्कृत,संस्कृत-जगत् में ख्याति प्राप्त विद्वान आचार्य रहस बिहारी द्विवेदी ने डॉ. तिवारी की प्रतिभा तथा विषय प्रकाशन के कौशल की सराहना करते हुए कहा कि कालिदास के श्लोकों को इतनी सहजता, सरलता और मधुरता के साथ श्रोताओं के सम्मुख उपस्थापित करने वाले डॉ. तिवारी जैसे विद्वान सम्प्रति दुर्लभ है। सहवक्ता डॉ. सूर्यकांत त्रिपाठी संस्कृत-विभाग गोरखपुर, विश्वविद्यालय ने कहा कि कालिदास के साहित्य में प्रत्येक पात्र का प्रकृति से आत्मीयता का सम्बंध है, सभी को उनसे प्रेरणा लेनी चाहिए। मुख्यातिथि प्रो. जया तिवारी ने कहा कि शाकुन्तल में प्रकृति के पांच तत्व पृथ्वी, जल, तेज, वायु, आकाश को सुरक्षित रखने के लिए कहा गया है।
विशिष्टातिथि डॉ. प्रकाश चंद्र जांगी ने ऋतुसंहार में वर्णित छ: ऋतुओं का वर्णन कर पर्यावरण संरक्षण की बात कही। उक्त कार्यक्रम में डॉ. प्रकाश चंद्र पंत जी , उत्तराखंड-संस्कृत-अकादमी के सचिव एस.पी. खाली तथा राज्य संयोजक डॉ. हरिश्चंद्र गुरुरानी, श्री मोहन सिंह रावत, डॉ. सुबोध भंडारी, रितु कालरा, डॉ. चंद्रा गोस्वामी, श्री गिरीश चंद्र, श्री प्रियदर्शन, श्रीमती गरिमा पांडेय, डॉ. प्रज्ञा सिन्हा तथा अनेक शोधार्थी व विद्यार्थी उपस्थित रहे। उक्त कार्यक्रम का संचालन महाविद्यालय के संस्कृत-विभाग में सहायकाचार्य डॉ. धर्मेन्द्र सिंह ने एवं तकनीकी कार्य का सम्पादन श्री तारा सिंह दानू ने किया।

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