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उत्तरकाशी में निर्माणाधीन सिल्क्यारा सुरंग में फसे मजदूरों को अब पूरे दस दिन हो गये है , यह किसी चमत्कार से कम नही है कि मजदूर वहा जिन्दा है सुरंग मे फंसे 41 श्रमिकों को सुरक्षित निकालने के लिए रीज्य व केन्द्र सरकार हर संभव राहत और बचाव अभियान मे जुटी है अङियान अंतिम चरण में है। सूत्रों के अनुसार कहा जा रहा है कि श्रमिकों को आज किसी भी वक्त बाहर निकाला जा सकता है। सरकार की तरफ से घटना स्थल पर एम्बुलेंस तैनात हैं। वही चिन्यालीसौंड के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में 41 बेड का अस्पताल तैयार किया गया है। इस सभी मजदूरों को वहा भर्ती किया जायेगा । जपूरत पड़ने पर श्रमिकों को एयरलिफ्ट कर एम्स ऋषिकेश लाया जाएगा। इस सम्बन्ध मे केंद्रीय सड़क एवं राजमार्ग राज्यमंत्री के साथ मुख्यमंत्री ने घटना स्थल पर पहुंचकर बचाव कार्यों की जानकारी ली।उत्तरकाशी के सिलक्यारा सुरंग में चलाए जा रहे बचाव अभियान को देखते हुवे मातली में अस्थाई रूप से मुख्यमंत्री कैंप कार्यालय बनाया गया है। अभियान के दौरान शासकीय कार्य और रेस्क्यू ऑपरेशन के बीच समन्वय स्थापित करने के उद्देश्य से यह कैम्प कार्यालय स्थापित किया गया है।
वहीं स्थानीय लोगो का मानना है कि गेव प्रकोप के कारण लुरंग से मजदूर नही निकल पा रहे है लोग स्थानीय देवता की ‘डोली’ को उत्तरकाशी में सिल्क्यारा सुरंग में लाए है , जहां फंसे हुए 41 श्रमिकों को बचाने की लिए कामना की गई है।
राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के सदस्य लेफ्टिनेंट जनरल सैयद अता हसनैन ने कहा, कि यह चुनौतीपूर्ण भरा कार्य है। उम्मीद है कि मजगूरों को अगले दो घंटों में हम उन्हें निकाल लेंगे वे परिजनों को लगातार ढाढस बधा रहे है ।, उन्होंने कहा कि यहां पर रेस्क्यू टीम भी रिस्क पर हैं और अंदर फंसे हुए मजदूर भी रिस्क पर हैं। हमें बचाव दल व मजदूर दोनों की सुरक्षा का ध्यान रखना होगा।” फिलबाल अभी तक मजदूर सुरंग मे ही है ।

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