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अल्मोड़ा  उत्तराखण्ड सरकार द्वारा पारित युनिफार्म सिविल कोड   के कुछ प्राविधान नागरिकों के मूल अधिकारों का हनन करते है , अत: राष्ट्रनीति संगठन इसे न्यायालय मे चुनौती देगा ,।यह बात आज राष्ट्रनीति संगठन के संयोजक , विनोद तिवारी ने प्रेस वार्ता में कही , उन्होने बताया कि  राष्ट्रनीति का यह डाफ्ट कई विद्वानो मे मिलकर बनाया जिसमे वे नितिन रावत  प्रो एस डी शर्मा ( सेवानिबृत विधि संकाय कु वि वि नैनीताल) सहित कई विद्वानो ने अधिवक्ता हिमाशु जोशी के नेतृत्व मे   समिति ने कौमन सिविल कोड़ का अध्ययन  किया ।इसके पता चला कि इसके  कुछ प्रविधान मौलिक अधिकारों का हनन करते है ,जिन्हे न्यायालय मे चुनौती दी जायेगी ।
प्रेस वार्ता मे कौमन सिविल कोड व केन्द्र सरकार द्वारा पारित कानूनों मे अन्तर्विरोध को स्पष्ठ करते हुवे कहा गया कि एक देश मे दो अलग -अलग कानून होने से संवैधानिक समस्याये उत्पन्न होगी बिशेषकर विवाह तलाक व सम्पत्ति पर पूर्व मे ही केन्द्र सरकार द्वारा पारित कानून है , अब राज्य सरकार ने भी अपने तरह से कानून बनाये है । कौमन सिविल कोड अध्याय दो की धारा 6 से 18 तक के प्रविधान निजता के मौलिक अधिकारों का हनन करते है । लिभ व रिलेशनसिप के प्राविधानों पर भी प्रेस वार्ता के माध्यम से आपत्ति ब्यक्त की गई । प्रेस वार्ता मे सामाजिक कार्यकर्ता  विनय किरौला भी मौजूद रहे ।

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