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देश आज़ादी के 75 वर्ष पूरे कर चुका है. ऐसे वक्त में होना तो यह चाहिए था कि अंग्रेजों के विरुद्ध 200 साल के संघर्ष के बाद जो देश हमें मिला, उसकी हासिल उपलब्धियों पर खड़े हो कर आगे का रास्ता तय किया जाता. लेकिन आज देश की सत्ता जिस भाजपा के हाथ में वह आज़ादी के बाद जो कुछ देश ने हासिल किया, उसे या तो बेचने पर आमादा है या बर्बाद करने पर उतारू है. देश के सार्वजनिक क्षेत्र की तमाम कंपनियों को औने- पौने दामों पर अपने चहेते पूँजीपतियों को मोदी सरकार बेच रही है.

बीते आठ सालों में संविधान के रास्ते से लोकतंत्र पर काबिज हुई मोदी सरकार, संविधान और लोकतंत्र के हर स्तम्भ पर हमलावर है.

बीते आठ वर्षों में देश के बैंकों का लगभग 12 लाख करोड़ रुपया, बट्टे खाते में जा चुका है. भ्रष्टाचार से लड़ने के मोदी सरकार के दावों की हवा, कुछ माह पूर्व संसद में पेश हुई ऑडिट रिपोर्ट में निकाल चुकी है. कैग की इस रिपोर्ट के अनुसार द्वारका एक्सप्रेस वे, जिसे 18 करोड़ रुपये प्रति किलोमीटर की दर से बनना था, उसे बनाने में एक किलमीटर पर 250 करोड़ रुपया खर्च किया जा रहा है. आयुष्मान भारत योजना के साढ़े सात लाख लाभार्थी, एक ही फोन नंबर से लिंक पाये गए. विभिन्न पेंशन योजनाओं का करोड़ों रुपया प्रचार में खर्च कर दिया गया.

देश में उन्माद और भावनाएं भड़का कर हिंसक वातावरण बनाने का सिलसिला बदस्तूर जारी है. अल्पसंख्यकों को निशाना बना कर उनकी मॉब लिंचिंग से शुरू हुआ सिलसिला उत्तराखंड के पुरोला और हरियाणा के नूह जैसे दंगों तक पहुँच गया है. मणिपुर महीनों से जल रहा है, वहाँ से जैसे वीडियो सामने आए हैं, वे मानवता को शर्मसार करने वाले हैं. पूरी दुनिया का चक्कर लगाने वाले प्रधानमंत्री, इतनी गंभीर स्थिति के बावजूद मणिपुर की तरफ मुंह करने को भी तैयार नहीं दिखाई देते हैं.

उत्तराखंड लंबे अरसे से भाजपा के डबल इंजन के शासन के साये तले है. डबल इंजन में रोजगार के अवसरों से लेकर जल-जंगल-जमीन तक की लूट ही डबल हुई है. भर्ती घोटाले सबके सामने हैं. बेरोजगारों को रोजगार देने के लिए सरकार का खजाना खाली है. लेकिन अपनी पार्टी के नेताओं को दायित्वधारी बना कर उन पर सार्वजनिक धन लुटवाया जा रहा है.

उत्तराखंड के जल-जंगल-जमीन जैसे संसाधनों को बड़े कॉरपोरेट के मुनाफे के लिए उन्हें कौड़ियों के मोल सौंपा जा रहा है. 2018 में जमीन के कानून में बदलाव करके भाजपा की सरकार ने 2018 में ज़मीनों की बेरोकटोक बिक्री का इंतजाम कर दिया. उत्तराखंड को व्यापक भूमि सुधार की आवश्यकता है. भूमि बंदोबस्त, भूमि सुधार, भूमि हीनों को भूमि का वितरण और चकबंदी जैसे कदम उत्तराखंड में ज़मीनों को बचाने और पर्वतीय कृषि की बेहतरी के लिए जरूरी हैं।

उत्तराखंड के शिक्षा- स्वास्थ्य- पलायन जैसे तमाम सवालों पर चर्चा के लिए और एक व्यापक जन आंदोलन खड़ा करने की दिशा में आगे बढ़ने के लिए भाकपा(माले) का तीसरा राज्य सम्मेलन 07-08 जनवरी 2024 को हल्द्वानी में आयोजित किया जा रहा है.

उत्तराखंड ही नहीं देश में संघर्षों के अप्रतिम नायक कॉमरेड चंद्र सिंह गढ़वाली के नाम पर सम्मेलन स्थल का नाम- कॉमरेड चंद्र सिंह गढ़वाली नगर रखा गया है. सभागार का नाम उत्तराखंड में माले आंदोलन की बुनियाद रखने वाले कॉमरेड दीपक बोस के नाम पर रखा गया है। माले आंदोलन के प्रमुख नेता रहे कामरेड मान सिंह पाल और पार्टी के राज्य कमेटी सदस्य एवं सेवानिवृत्त प्रधानाचार्य कॉमरेड के.पी.चंदोला के योगदान को याद करते हुए, सम्मेलन के मंच का नाम कॉमरेड मान सिंह पाल – कॉमरेड के.पी. चंदोला मंच रखा गया है।

सम्मेलन में अन्य वामपंथी पार्टियों- भाकपा, माकपा एवं जनवादी संगठनों एवं व्यक्तियों को भी 7 जनवरी को होने वाले खुले सत्र में आमंत्रित किया गया है.

भाकपा माले के 7-8 जनवरी को होने वाले राज्य सम्मेलन का स्थल: श्री श्याम गार्डन, नियर ट्रांसपोर्ट नगर, बिरला स्कूल रोड, देवलचौड़, हल्द्वानी में होगा।

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