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आज लगभग पाच सौ वर्ष के संघर्ष के बाद पूरा देश ,रामलला ट्रष्ट्र के अयोध्या मे आयोजित कार्यक्रम के साथ अपने आप को जोडकर गर्व की अनुभूति कर रहा है , राम का महत्व रावण पर विजय प्राप्त करने के  कारण  ज्यादा महत्वपूर्ण है , । राम व रावण मे सोच व समझ का अन्तर उनकी राजनीति मे भी दिखाई  देता है ।

महाबली रावण उस दौर का सबसे शक्तिशाली राजा था , संसार भर के राजा उसके भय से तृस्त्र थे ,। वह भगवान शंकर का महाभक्त था आचार्यो व गुरुजनों का वह हमेशा तिरस्कार करता रहता था। वह शान्ति के मार्ग मे चल रहे साधु सन्त सन्यासियों से भी टैक्स वसूलता था वही राम जी साधु सन्त महर्षियों के रक्षक निर्धनो को भी सम्मान देने वाले अभाव को दूर करने वाले थे ।

रावण मायावी , वाकपटु वैदिक विद्वान धन सम्पदा से , सम्पन्न वहु विद्याओं का ज्ञाता था , पर उसमे कमी यह थी ,कि वह साधु सन्तों महर्षियों की बात नही मानता था , रावण अपने अनुसार साधु सन्तों को चलाता था , । जो उनकी हा में हा नही मिलाता था , उसे वह अपना दुष्मन मान लेता था , । उस जमाने मे आज की तरह की ऐजेन्सिया नही थी पर उसके निशाचर तापों दिशाओं मे घूमते रहते थे , वह रावण के विरोधियों पर हमेशा हमलावर रहते थे , पर राम ने अपने राज्य के भीतर अपमे बिरोधियों को बल से नही नीति से पराजित किया अपने बिरोधियो को बल पूर्वक समाप्त करता था क रावण ने अपने भाई की सलाह नही मानी , राम ने भाई के लिये बनवास स्वीकार किया , राम ने साधु का रूप धारण कर बनवासियों के कष्ट दूर किये रावण ने साधु का वेश धारण कर सीता का अपहरण किया ।बनवासियों पर जुल्म ढाये ।

धार्मिक स्वरूप दिखाने से कोई धर्मिक नही हो जाता रावण के आचरण से यह स्पस्ठहै , भक्त हमेशा सही हो यह भी जरूरी नही रावण से बडडा शंकर भर्त कोई नही था , गरीबों को लूटकर देश को सम्पन्न बनाने से भी कोई देश शक्तिशाली नही बन जाता लंका इसका उदाहरण है । पर सबके साथ न्यायोचित ब्यवहार करने से कोई राज्य अयोध्या बन जाता है यह घटनाक्रम हमे बताता है कि , कि अहंकार , घमण्ड , हमेशा नही रहता , न्यायोचित ब्यवहार ही सबका हितैषी है ।

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