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अल्मोड़ा , नगर मे आबारा घूम रही गायों का पेट प्लास्टिक कचड़े का गोदाम बन गया है , । गौ सदन ज्योली मे नगर पालिका द्वारा पिछले गिनो भेजी गई गाय , घास नही खा रही । कचड़े की चाह मे वह खोलने पर नगर की तरफ भागने लगती है , ।घास खाने के प्रति इन गायों मे कोई रुचि नही है , नमकीन कचडा इनका प्रिय भोजन है , लोग पालीथीन मे अपना बचा हुवा भोजन कूड़ेदान मे डालते है , । यह कूड़ा व कचडा इन आबारा गायों का निवाला बन रहा है ।गाये पालिथीन से खाना अलग नही कर पाती है , । गौ सदन मे ये गाये अक्सर बिमार होती जा रही है । इसी क्रम मे जब एक गाय की पालीथीन के कारण मौत हो गई ,उसे गड़डे मे डाल कर अन्तिम संस्कार किया गया किन्तु रात्री मे ,जंगली जानवरो ने जब गड़्डे को खोदकर उसके पेट पर प्रहीर किया तो इसके पेट मे कमसे कम बीस किलो प्लास्टिक कचडा भरा था लुवह जब इस गड़्डे को पुन:मिट्टी से ढकने के लिये मजदूर लगाये गये तो ये मजदूर यह देखकर हैरान रह गये ।।

गौ सेवा न्यास के सचिव दयाकृष्ण काण्डपाल ने आम लोगो से अपील की है कि वह बचा हुवा खाना पालीथीन मे भरकर कूड़ेदानो मे ना डाले , । यदि डालना ही है तो खोलकर रखे , यह बचा हुना खाना नगर मे बन्दरों मे आवारा गायों को , प्रोत्साहन देता है , पशुपालको ने सामान्यत: यह धारणा बना ली है कि जब तक गाय दूध देती है तभी तक लोग उसे घर मे रखते है , ज्यों ही वह गाविन होती बै और दूध देना बन्द कर देती है तो लोग उसे आबारा सड़को पर छोड,देते है ,यह चलती फिरती गाय , जब पुन: बच्चा देती है तो लोग इसे घर ले जाते है , तमाम तरह के प्लास्टिक अवशिष्ट खा चुकी ये गाये बिषैला दूध का उत्पादन करती है , इनका दूध गुणकारी ना होकर विमारी का कारण है, अत: छोड़ी गई गायों का दूध ना पिये ।

गाय के पेट से निकला प्लास्टिक कचड़ा

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