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  अल्मोड़ा उत्तराखण्ड  एक बनाच्छादित प्रदेश है ,  ।किसी जमाने मे  ये बन ग्रामीणों की अर्थब्यवस्था के प्रमुख केन्द्र थे  , किन्तु बर्तमान समय मे तकनीकि बदलाव व बनविभाग की चौधराहट के चलते आम जनों का बनों से मोहभंग हो चला है , ऐसे समय मे भी लोग जंगलों मे लगी आग को बुझाने के लिये अपने जान की बाजी लगा रहे है ।ताजा घटनाक्रम के अनुसार सोमेश्वर वन रैन्ज के ग्राम खाईकट्टा मे  40 वर्षीय महेन्द्र सिह की आग बुझाते समय झुलस जाने के कारण उसकी मौत हो गई  , गाव मे आग बुझाने के  लिये अन्य लोग भी गये थे किन्तु महेन्दर अलग दिशा की  तरफ चला गया ग्रामीणों को उलके झुलस जाने का अंदेशा तब हुवा जब वह लौट कर घर  नही आया जब ग्रामीणों ने उसकी खोजबीन की तो जंगल मे उसका अधजला शव मिल गया  ,। शव का पन्चनामा भरकर उसे पोस्ट्रमास्ट्रम करने के बाद परिजनों को सौप दिया है । बनाधिकारी दीपक सिंह के अनुसार यह आग बन पंचायत मे लगी थी , उन्हे आग लगने की सूचना विलंम्ब से पता चली ।

महेन्दर की इस अप्रत्याशित मौत से उसके परिजन अक्यधिक आहत है , उन्हों वन विभाग से इस घटनाक्रम पर समुचित कार्यवाही की मांग की है

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