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जब से मनुष्य.जाति के हाथ मे मोवाईल आया है तब से टी वी, समाचार, प्रिन्ट समाचार सब खतरे मे है ।एक क्लिक में प्रचार या दुस्प्रचार किया जा सकता है , ।एक जमाना था जब चिठ्ठी- पत्री भेजी जाती थी। भेजने वाला व जिसको भेजा गया दोनो के बीच मे लिखने व पढने वाला कोई तीसरा हो सकता था। पर  अब स्वयं लिखो स्वयं पढो एक  क्लिंक में सार्वजनिक कर दो सबको पढाओं, तत्काल क्रिया व प्रतिक्रिया हो जायेगी, ।आप चाहे तो ईमानदार को चोर व चोर को महान ईमानदार सावित करने मे सेकिन्ड़ की देरी भी नही लगा सकते ।

यह मीड़िया के दुरुपयोग का युग है सदुपयोग इसलिये नही हो सकता कि दस  प्रतिशत ही विवेक का इस्तेमाल कर सकते है , यदि सौ लोग काम कर रहे हो तो अधिकतम दस लोग उनको काम मे लगाये रखने  के लिये बहुत अधिक है । ऐसे ही किसी खबर को यदि सौ लोग पढ रहे हो को अधिकतम दस ही खबर की पुष्ठि करेंगे नब्बे लोगों मे जो रायता फैल जायेगा उसे साफ करने मे बहुत मेहनत की जरूरत होगी ।

इन दिनों चुनावों का जोर है मतदाता खामोश है जो बोलमा पढना लिखना, व देखना  है वह मोबाईल मे हो जाता है । बेचारे चुनाव प्रचारक घर -घर ठोकर खा रहे है , जरा सोचिये ऐसी कौन सी जानकारी ये मतदाताओं को देने वाले है जो उन्हे नही पता , टी बी या मोबाईल रायता फैला चुके है कि किसमे क्या ूोला है कब -रब बोला है , कि कौन बिजयी होने वाला है , क्या वही जीतेगा जिसे ने बोट देंगे या वह जिसे ने बोट नही गेमे वाले है ,उन्हे यह भी मालूम है कि वह बोट किसे व क्यों देने  वाले है,टी वी किसको जिता रहे है किसे हपा रहे है   । मोबाईल मुद्दे तय कर चुका है  ।मोबाईल ने जो मुद्दे तय कर दिये है वह महंगाई , बेरोजगारी , निजि शिक्षा , स्वास्थ , बिगडते सामाजिक परिवेश  नग्नता ,  मूलभूत जरूरतों से ज्यादा महत्वपूर्ण मुद्दे है ,। लोग जान चुके है कि सरकार ने मन्दिर , बुल्डोजर , धर्म के मामले मे महत्वपूर्ण काम किये है इस बार जिसकी भी  जीत होगी  काम के आधार पर नही टी वी मोबाईल प्रवचन के आधार पर होगी , ज्यों ही मतदाता इन मिद्दों से थोडा ध्यान हटाते है ,त्यों ही मोबाईल फिर याद दिला देता है ,बोट कहा देना है। । अब तो  लोग सोच रहे है कि वे नेताओं को सुनने क्यों जाये , मोबाईल तो बता भी देगा कि उन्होंने क्या कहा , वह तो सुना भी देगा । बेकार में नेता जनसभाये कर रहे है मोबाईल मे लाईफ बीडियों ही काफी है लोगों को पताहै नेता जो सोमेश्वर बोल चुके वही सल्ट मे भी बोलेंगे ,। मोबाईल सुना ही देगा , सच मे मोबाईल मे नेताओं के भाषणों को भी  गफ्फी की शायरी ही मान लिया है ,लोग दुविधा मे है ,क्या सच मानू क्या झूठ, ।

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