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अल्मोड़ा  मौसम मे हो रहे बदलाव का असर अब पहाड़ो  में भी दिखने  लगा है ,ग्लोबल वार्मिग, जनसंख्या का बढ़ना –  मैदानो से रेता शब्जी आदि का आयात व इनके साथ  इन बीमारियों क़े मच्छरों का आकर प्रकोप फैलाना हीडेंगू का कारण है  यह जानकारी देते हुवे डा जे सी दुप्गापाल ने कहा कि एक मच्छर क़े काटने से होता है, जिसमें बुखार क़े साथ शरीर में लाल चकत्ते हो जाते हैं! ऐेसे रोगियों में रक्त कार्णकाओ में प्लेटलेटस की अत्यधिक कमी हो जाती है! इनकी पूर्ती क़े लिए प्लेटलेट (खून का भाग) चढ़ाने पढ़ते हैं! प्लेटलेट्स कम न हो इसके लिए आयुर्वेदिक (घरेलु) उपाय भी कार्य करते हैं – किवी फल का प्रयोग, पपीते क़े पत्तों को चबाना, अमृत बेल (ग्लोई) (घृत कुमारी) का प्रयोग खाने में किया जाता है! हमें पूरे बदन को ढककर रखना चाहिए जिससे मच्छर काट न सके, मच्छर मार दवाइयों और मच्छर दानी का प्रयोग करना चाहिए, समय-समय पर जहां कहीं भी पानी का भराव हो पानी बदल देना चाहिए तथा नालियों में व दरवाजों के पीछे फॉगीग करना चाहिए! घर में कहीं भी पानी किसी भी बर्तन में रोके नहीं! मच्छर क़े बच्चे इन्हीं पानी में जन्म लेते हैं! फूलदान का पानी बदलते रहे?!
गोष्टी – – – – – – में भुवन, भावना, सुंदर, नितेज, मनोज सनवाल, रीता दुर्गापाल पुष्पा सती आशा पंत, हेम चंद्र जोशी ,रूपा, दिवाकर, देवेन्द्र, भाष्कर, मीता उपाध्याय आदि लोग गोष्टी में उपस्थित रहे व जानकारी प्राप्त की!

” नेत्र दान पखवाड़ा”


नेत्र दान पखवाड़े के अंतर्गत नेत्र चिकित्सालय कर्बला में एक गोष्ठी का आयोजन किया गया, इस दरमियान, 25 अगस्त से लेकर 8 सितंबर तक नेत्र दान के विषय में जन जागरण पैदा किया जा रहा है। हमारा देश ऋषि – मुनियों का है यहा परम्परा दान की बनी हुयी है! इस विषय पर आज चर्चा करते हुए डॉ दुर्गापाल ने बताया कि महर्षि दधीची ने अपनी हड्डियाँ दान कर दी थी, राजा शिवि अपने अंग अंग काटकर दान कर दिए थे, आइए आज हम संकल्प करें कि मरने से पूर्व हमारी आंखे जरूरत मंद को दान दी जाएं , ताकि मरने के बाद भी हम इस सुन्दर दुनिया को देख सकें ।
हमारे देश में नेत्र दान करने वालों की बहुत कमी है लेकिन नेत्र लेने वालों की आवश्यकता है अतः हम संकल्प लें के हमारे मरने के बाद हमारी दो आंखे जरूरतमंद की आँखों में लगायी जायें और वह दुनिया देखे!
जब आंख की पारदर्शी पुतली किसी कारण से खराब हो जाती है तो दिखना बंद हो जाता है जिसको हम लोग ग्रामीण भाषा में फूला कहते हैं जो कि सफ़ेदी लिया होता है। इसको बदलना आवश्यक हो जाता है! मरे हुए व्यक्ति से अच्छी पुतली निकालकर जीवित व्यक्ति की आँखों में लगाई जा सकती है। जिस प्रकार से घड़ी का शीशा खराब हो जाता है और बदलने की आवश्यकता होती है उसी प्रकार से ये विधि नेत्र दान की भी है! भारत में हर मेडिकल कॉलेज में नेत्र बैंकों की सुविधा है! लेकिन उत्तराखण्ड में अभी तक नेत्र बैंक की सुविधा नहीं हो पायी है! हमारे देश में 1 करोड़ व्यक्ति दृष्टि हीन हैं और इनको नेत्र ज्योति की आवश्यकता है। इसलिए आयें नेत्र की दान की आवश्यक जानकारी पता करें
और नेत्र दान करने की प्रतिज्ञा लें! इस गोष्ठी में बालम नेगी, सुंदर लटवाल, केशर अधिकारी,नितेज बनकोटी, डी .के.जोशी, चन्दृमणि भट्ट, रश्मि डसीला, भुवन आर्या, भावना नेगी आदि शामिल रहे

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