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अल्मोड़ा महाशिवरात्रि पर्व आज बड़ी धूमधाम के साथ बनाया गया इस अवसर पर जहां शिव मंदिर में भक्तों की बड़ी कतार देखी गई वहीं अनेकों लोगों ने भगवान शिव की अपने घरों में भी आराधना की विशेष श्रृंखला में आर्य समाज अल्मोड़ा में महर्षि दयानंद का बोध दिवस महाशिवरात्रि पर्व मनाया गया, इस अवसर पर विशेष यज्ञ अनुष्ठान किए गए तथा वक्ताओं ने अपने विचार व्यक्त किया ।इस अवसर पर आयोजित संगोष्ठी को संबोधित करते हुए आर्य समाज अल्मोड़ा के मंत्री दया कृष्णा काण्डपाल  ने कहा कि चंकारा मे बालक मूलचन्द   जब अपने पिता पं कर्षण तिवारी के आग्रह पर महाशिवरात्री पर्व पर रात्री जागरण मे बैठे थे  तो उन्होंने देखा की रात्रि के समय   शिव तो प्रकट नहीं हुए एक चूहा अवश्य उछल-कुद  मचाने लगा जिसे वहां पर रखी हुई समाज की पूजा सामग्री को तहस नहस  कर डाला, ऐसे में दयानंद के मन में यह जिज्ञासा पैदा हुई कि वह वास्तविक शिव को खोजेंगे समय के साथ-साथ महर्षि दयानंद ने देश की दुर्दशा पर भी चिन्तन मनन करना आरंभ किया उन्होंने पाया की समस्या दुखों का जो कारण है उसका मूल स्रोत अज्ञानता ही है  वे वास्तविक शिव की खोज मे निकल पड़े ,स्वामी दयानंद ने बहिर्मुखी उपासना के बजाय अंतर्मुखी निराकार निर्गुण परमेश्वर की उपासना पर विशेष बल दिया और देश में 1875 में आर्य समाज की स्थापना की उन्होंने नारा दिया कि वेदों की तरफ लोटो इसका असर देश के राष्ट्रीय चेतना पर व्यापक रूप से पड़ा और देश धार्मिक चेतना के साथ-साथ राजनीतिक और सामाजिक चेतना के क्षेत्र में भी अग्रसर हुआकार्यक्रम मे आर्य समाज अल्मोड़ा के प्रधान दिनेश चन्द्र तिवारी उप प्रधान मोहन सिह रावत कोषाध्यक्ष गौरव भट्ट तथा मान सिह रावत ने भी अपने विचार ब्यक्त किये तथा विश्व शान्ति की कामना की ।

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