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जोषीमठ का मामला अभी ठंण्ड़ा भी नही हुवा कि रुद्रप्रयाग से व नई टिहरी से डरावनी तस्बीर सामने आ रही है । सरकारों को अब इस दिशा में अवश्य सोचना चाहिये अन्यथा भविष्य का उत्तराखण्ड़ कही आपदाओं व हादसों का प्रदेश ना बन जाय

प्रकाशित समाचार बेहद चौकाने वावे तत्थ्यों की तरफ संकेत कर रहे है इन खबरों में भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के सैटेलाइट डेटा का हवाला देते हुवे कहा गया है कि उत्तराखंड के रूद्रप्रयाग और टिहरी गढ़वाल जिले पिछले 10 सालों के दौरान भूस्खलन जमीन खिसकने की घटनाओं से सबसे ज्यादा प्रभावित रहे हैं।टिहरी गढ़वाल जिले में जनसंख्या का दबाव भी है । यहां पर जनसंख्या का घनत्व सबसे ज्यादा है जिस वजह से यहां पर जमीन खिसने की घटनाओं की वजह से जोखिम भी ज्यादा है। हैदराबाद स्थित नेशनल रिमोट सेंसिंग सेंटर के वैज्ञानिकों द्वारा किए गए लेटेस्ट रिस्क असेसमेंट में यह जानकारी निकल कर सामने आई है।

इस रिसर्च के लिए वैज्ञानिकों ने 1998 से 2022 तक हुए लगभग 80,000 लैंड सिंकिंग की घटनाओं का एक डाटा बेस तैयार किया था। भारत में हुआ लैंड सिंकिंग की घटनाओं का मैप बनाने के लिए साल 2013 में आई केदारनाथ आपदा और साल 2011 में सिक्किम भूकंप के ईसरो डेटा का भी इस्तेमाल किया गया।

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