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जोशीमठ धसते हुवे जशीमठ का नक्शा अब सार्वजमिक कर दिया है । इस नक्शे के जारी होने के बाद वे घर भी आपदा की जद है आ गये है दो अब तक सुरक्षित समझे जा रहे थे ।जहां देश एक तरफ राम मय हो रहा है वही अब जोशी मठ का भविष्य कल से उदास हुआ पड़ा है ..।
जोशीमठ बचाओं संघर्ष समिति के अतुल सती कहते है जबसे जोशीमठ के डेंजर ज़ोन का नक्शा सार्वजनिक हुआ है लोग परेशान हैं वे अपने भविष्य को लेकर । विचार मंथन मे है कि
क्या करेंगे कहां जाएंगे .?क्योंकि अब तक तो सिर्फ कुछ घर चिन्हित थे । और वे मानसिक तौर पर तैयार हो चुके कि उन्हें कहीं और बसना होगा .. कहां तो उनका भी तय नहीं हुआ था ..परंतु जाना तय था ।

अब वे लोग ..घर ..क्षेत्र भी इस दायरे में आ रहे हैं.. या आ गए हैं ..या ला दिए गए हैं ..जो आम तौर पर सुरक्षित माने जा रहे थे ।
इससे एक बड़ी आबादी इसके दायरे में आ गई है । आबादी के लिहाज से देखें तो लगभग आधी जनता इसके दायरे में है । ऐसे में लोगों का हैरान परेशान होना स्वाभाविक है ।

इसके ऊपर से सरकार की जो प्रस्तावित योजना है उसने लोगों की चिंता को और बढ़ा दिया है । सरकार के प्रस्ताव के मुताबिक लोगों को जोशीमठ से 100 किलोमीटर दूर गौचर के पार..नदी पार बमोथ नाम के गांव में बसाया जायेगा । जो न सिर्फ मुख्य सड़क से दूर है.. आबो हवा अलग है .. जोशीमठ के मुकाबले हर दृष्टि से हानिकारक विकल्प है । सुनते हैं वहां पीने के पानी का संकट पहले से है जबकि जोशीमठ सर्वाधिक जल स्रोतों से आच्छादित है ।
जोशीमठ की अधिकांश जहां पर्यटन तीर्थाटन पर निर्भर व्यवसाय है ..लोगों के सामने रोजगार का संकट खड़ा हो जाएगा ।
बहुत से होटल होमस्टे इस दायरे में आ रहे हैं ।

सिर्फ घर और मुआवजे का कुछ पैसा जीवन चलाने को पर्याप्त नहीं है । सरकार के पास विस्थापन पुनर्वास का एक विस्तृत न तो योजना है न नीति ..सिर्फ घर के बदले पैसा और घर के बदले घर । शेष लोगों के रोजगार व्यवसाय आदि के बारे में न कोई योजना है न सोच । जिससे लोगों में भविष्य को लेकर आशंका होना स्वाभाविक है ।

जोशीमठ में तरह तरह की चर्चाओं और भय आशंकाओं का माहौल बना हुआ है । लोग समझ नहीं पा रहे सरकार आखिर चाहती क्या है ।
दूसरी ओर मंदिर का हल्ला है ..पर जोशीमठ में तो आम जन की अब यही चिंता है ..?

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