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अल्मोड़ा – जोशिमठ त्रासदी को लेकर उत्ताखण्ड लोक वाहनी की बैठक वाहनी के वरिष्ट नेता एडवोकेट जगत रोतेला की अध्यक्षता मे सम्पन्न हुई । बैठक की संचालन पुरन चन्द्र तिवारी ने किया , ।बैठक मे वक्ताओं ने जोशिमठ आपदा को मानवीकृत आपदा बताते हुवे कहा कि उत्तराखण्ड़ एक नया प्रदेश जरूर बना पर नीतियां दिल्ली से बनती रही , जिसका परिणाम है कि इन पहाड़ो को सहेजने व सवारने वाला यहां का निवासी अब इन पहाड़ो को सरकारी नीतियो व योजनाकारों की बदनियति के कारण छोड़ने के बाध्य है। 2006 मे वाहनी ने सम्पुर्ण उत्तराखण्ड मे जल प्रवन्धन की नीतियों के खिलाफ देहरादून से फलिन्ड़ा की पैदल यात्रा कर सरकार को आगाह किया था कि वह पहाड़ का सीना फाड़कर विकास की की इबादत्त ना लिखे वाहनी ने उत्तराखण्ड़ की हिमानी तथा गैर हिमानी नदियों के संरक्षण व संम्बर्धन के लिये आवाज उठाई थी । किन्तु सरकारी तन्त्र हरहाल मे पहाडो का सीना चीरने , अरबों कॆ कर्ज से बनने वाली परियोजनाओं को बनाने मे तब से लेकर अब तक भी आमादा है। एन टी पी सी , की परियोजनाओं का ठेका ऐसी- ऐसी कम्पनियों को दिया गया जिनके पास बांध व सुरंग बनाने की बिशेषज्ञता ही नही थी लिंको पैन बनाने वाली कम्पनी बांध व सुरंग बनाने लगी ये सारे सवाल तत्कालिक वाहनी के नेता शमशेर सिंह बिष्ट पुरे प्रदेश में उठाते रहे । आल वैदर रोड़ व एन टी पी सी की सुरंग व बाँध आधारित परियोजनाओं ने ब्लास्ट व जे सी बी कटिंग के माध्यम से पहाड़ो को हिला कर रख दिया आल वेदर रोड़ का मामला सुप्रिम कोर्ट मे गया निगरानी के लिये रवि चौपड़ा कमेटी बनाई गई पर सरकार ने देश की सुरक्षा का हवाला देकर कमेटी के सुझाव मानने से इनकार कर दिया । 2014 मे केदारनाथ आपदा ने श्रीनगर तक को अपने आगोस मे ले लिया था ।वाहनी ने कहा है कि पहाड़ के विकास व बिजली के निर्माण के लिये वाहनी ने अल्मोड़ा जनपद के रैस्ृुना गांव मे यूजर्स कम्पनी का एक माडल बनाने की योजना बनाई थी जिसे सरकार से स्वीकृति नही मिली जिसे यदि अमल मे लाया जाता तो विजली व लोगों की आर्थिकी हिमालय की रक्षा हो सकती थी , वाहनी की पहल पर ग्रामीणों ने अपनी कम्पनियां भी बना ली थी पर सरकारे बड़े बांधों को बनाने के लिये जमीन का सीना चीरने व व पहाड़ के बचे खुचे लोगो की जमीनों को बांधों मे डुबाने पर आमादा है। जोशिमठ में आ रही प्राकृतिक आपदा जमीन के भीतर हो रही हलचल का प्रतीक है जोशिमठ का इतिहास है कि यह प्राकृतिक हलचल का इलाका है यहा बड़े निर्माण स्वीकार्य नही है कत्यूरियों को भी अपनी राजधानी बदल कर बैजनाथ लानी पड़ी , ।शंकराचार्य पीठ कई वर्षें तक इन्ही आपदाओं के कारण बिलुप्त रही , इसके बाबजूद भी जोशीमठ बैदिक सभ्यता , धार्मिक परम्पराओं व भारत की मजबूत सीमा का परिचायक है सरकार को यहां के निवासियों का पुनर्वास करना चाहिये। तथा जोशीमठ को सुरक्षित रखने के उपाय करने चाहिये । वाहनी की बैठक मे दयाकृष्ण काण्डपाल , जंगबहादुर थापा , रेवती बिष्ट जगत रौतेला अजय मित्र विष्ट विशन दत्त जोशी , अजय मेहता , कुणाल तिवारी , आदि लोग शामिल थे ।

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