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राजनीति मे राजनैतिक दल  अपना घोषणापत्र जारी कर यदि जनता से कोई वायदा करते है फिर सत्ता मिलने पर उसे  पूरा नही करते तब बिपक्षी र्दलों  व आम जनता को यह अधिकार है कि वह सरकार की आलोचना करें , व अपना घोषणा पत्र जारी कर जनता को अपनी नीतिया बताये ,किन्तु सत्ताधारी पार्टी को भी यह हक है कि वह अपनी सरकार की उपलब्धियां गिनाये योजनाये बताये , ।जनता के हित मे किये गये कार्यो की बदौलत बोट मांगे ।

किन्तु जब सरकार के पास अपनी उपलब्धि बताने योग्य बातें नही होती व भविष्य के मुद्दे नही होते , व बिपक्ष भी अपनी योजनाये नही बताता तब मतदाताओं का आर्थिक , भौतिक वस्तुओं का लोभ – लालच, व अफवाह फैलाकर बोट हासिल करना लोकतंन्त्र की हत्या करने जैसा है । 

सामान्यत: लोकतन्त्र मे बोट पाने के लिये उम्मीदवारो द्वारा   दवंगई , आर्थिक प्रलोभन , या बोट के बदले कुछ कथित उपहार देने की प्रथा के कारण राजनीति मे चरित्रवान लोगो का आना असम्भव हो गया है । अपनी बात कहने के लिये नेताओ द्वारा  मतदातओं को पैसे दे देकर बुलाना , शराब बितरित करना  , दबंगई दिखाना निर्चाचन प्रणाली में आम बात हो  गई है ।निर्वाचन आयोग  के प्रेक्षक भलेहि कड़ी निगरानी रखते है पर हर जगह उनका पहुचना संभव नही है , इसी का लाभ भ्रष्ठ नेता व लालची मतदाता उठाते है , व चरित्रवान तथा जनमुद्दों पर लडने वाले नेताओं का चीरहरण करते है ।

नेताओ का भ्रष्टाचार व मतदाताओं की चरित्रहीनता लोभ लालच के कारण ही अब भारतीय लोकतन्त्र मे चरित्रवान लोग सामने आने से घबराने लगे है । चरित्रवान राजनैतिक कार्यकर्ताओं के लिये चुनाव की ब्यवस्था करना एक चेढी खीर है , पर असली लोकतन्त्र के खेवन हार तो यही चरित्रवान लोग है ।किन्कु भ्रष्ट व वेईमान लोग इस वास्तविक लोकतंन्त्र के बिरोधी है ।

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