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अल्मोड़ा विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर उत्तराखण्ड लोक वाहिनी की बैठक आयोजित हुई , बैठक मे उत्तराखण्ड का बिगडता पर्यावरण तथा पानी की समस्या पर विचार हुवा , बैठक मे बिचार ब्यक्त करते हुवे उत्तराखण्ड लोक वाहिनी के प्रवक्ता दयाकृष्ण काण्डपाल ने कहा कि सरकारो द्वारा घर- घर नल, घर -घर जल योजना तो चलाई जा रही है पर इस तत्थ्य पर वितार नही किया जा रहा है कि , नल मे जल कहा से आयेगा , । पानी का अत्यधिक दोहन , व वनों पर सरकारी हस्तक्षेप के कारण लोगो ग्वारा अपने परम्परागत बृक्ष व जल संरक्षण के उपायों से दूर तो हो जाने के कारण ,अब लोग अपने नौले व धारो से भी दूर हो गये है , ।यही नही शहरो के आसपास शीवर लाईन ना होने से नौलो व धारों मे शीवर का पानी पहुच कर भूगर्भ जल को भी दुषित किया जा रहा है । जल बढाने वाले पौधो के बजाय जल दोहन को बढावा देने वाले पौधों का रोपण हो रहा है , किन्तु ये पौधे भी आग के हवाले हो जाते है , उलो वा ने 2014 में विभिन्न सामाजिक संस्थाओ के साथ मिलकर नदी बचाओं अभियान चलाया था जिसके बाद कोसी पुनर्जनन योजना बनी पर योजना के क्या परिणाम सामने आये यह आंकडे जनता को मालूम नही है , । एड जगत रौतेला ने कहा कि धरती का आज जो तापमान बढा है इसे वाहिनी के लोगो मे 1970 के दशक मे ही समझ लिया था लोगो के सहयोग से पहाड़ो मे विश्व प्रसिद्ध वन आन्दोलन चला , किन्तु सरकारों ने आन्दोलन की भावना मा समझ कर लोगो को ही जल जंगल व जमीन से दूर कर दिया तथा वन अधिनियम 1980 थोप दिया गया ।
इस अवसर पर नदी बचाओं अभियान को राधा बहिन के साथ मिलकर नेतृत्व दे रहे डा शमशेर सिंह बिष्ट का भी भावपूर्ण स्मरण किया गया संगोष्ठी ंे एड जगत रौतेला , पूरन चन्द्र तिवारी , जंगबहागुर थापा , अजय मित्र बष्ट , कलावती तिवारी , रेवती बिष्ट हारिस मुहम्मद विशन दत्त जोशी आदि शामिल रहे ।

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