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अल्मोड़ा जागेश्वर में मास्टर प्लान के तहत हो रहे हो रहे सड़क चौड़ीकरण में 1000 देवदार के पेड़ों को काटने की बात सामने आ रही है उसका उत्तराखंड लोक वाहिनी निंदा और विरोध करती है उत्तराखंड लोक वाहिनी के वरिष्ठ नेता जगत रौतेला ने यह बात कही. उन्होंने कहा कि जो पेड़ काटे जा रहे हैं वह प्राण वायु के साथ-साथ लोगों की आस्था से भी जुड़ा हुआ है दारुख वनों को शिव का निवास माना जाता है और उनकी पूजा भी की जाती है इन वृक्षों को शिव पार्वती गणेश वी पांडव के रूप में भी पूजा जाता है. जिन्होंने एक पौधा भी न लगाया हो उन्हैं पेड़ होने का मतलब क्या समझ में आएगा, इन लोगों के लिए पेड काटना और लगाना दोनों पैसा कमाने का जरिया है आज के समय मे जब विरोध की संस्कृति मृतप्राय हो गई है, तो क्या बच पाएंगे ये पेड ? यह एक बहुत बड़ा सवाल है पूरे पहाड़ की अस्मिता के लिए , तथाकथित विकास के नाम पर विनाश की अवधारणा मानवता के लिए और उत्तराखंड वासियों के लिए बहुत बड़ा संकट है.

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