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उत्तरकाशी सुरंग निर्माण के दौरान हुवे भूस्खलन से सिल्क्यारा में निर्माणाधीन सुरंग में फंसे 40 श्रमिकों को निकालने के लिए किया जा रहा रेस्क्यू ऑपरेशन पिछले चार दिन से जारी हैं। सुरंग में फंसे श्रमिकों को अभी तक बाहर नहीं निकाला जा सका है। लेकिन बचाव दल लगातार कोशिशे कर रहा है सुखद खबर यह है कि सभी मजदूर अन्दर सुरक्षित है ये सभी खुदाई करने के दौरान हुवे भू स्खलन से फंसे हुए है। इन लोगों को बचाने की प्रक्रिया में तेजी लाने के लिए एक बरमा ड्रिल मशीन लगाई जा रही है। इसके अलावा, फंसे हुए श्रमिकों के मानसिक स्वास्थ्य पर लगातार संचार माध्यमों से लगातार नजर रखी जा रही है ।फंसे हुए श्रमिकों को भोजन और दवाओं की आवश्यक आपूर्ति भी प्रदान की जा रही है। बचाव दल श्रमिकों के साथ नियमित संचार बनाए रख रहे हैं, यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि उनका उत्साह बरकरार रहे और उनकी उम्मीदें बरकरार रहे।

सुरंग के अंदर ‘अमेरिकन ऑगर’ मशीन की तैनाती बचाव अभियान में एक महत्वपूर्ण साबित हो रही है , बचाव दल द्वारा इस विशेष उपकरण से सफाई प्रक्रिया में तेजी लाने और फंसे हुए श्रमिकों को सुरक्षा के करीब लाने की की कोशिशें की जा रही है। इसके अलावा, जहां सुरंग है वहां के पहाड़ों की नाजुक स्थिति को देखते हुए नॉर्वे और थाईलैंड के विशेषज्ञों की मदद ली जा रही है।यह घटना पिछले 12 नवंबर को, हुई जब सिल्क्यारा सुरंग परियोजना ढह गई, घटना में 40 निर्माण श्रमिक मलबे में फंस गए। अब ये मजदूर 100घन्टों से घंटों से अधिक समय से, सुरंग के भीतर कैद हैं, उनका जीवन खतरे मे है जानकारी के अनुसार, सुरंग के अंदर ‘अमेरिकन ऑगर’ मशीन लगाई गई है इस विशेष उपकरण से सफाई प्रक्रिया में तेजी लाने और फंसे हुए श्रमिकों को सुरक्षा के करीब लाने की उम्मीद है।

‘अमेरिकन ऑगर’ मशीन चार धाम तीर्थयात्रा मार्ग पर ध्वस्त सुरंग से 30 किलोमीटर से अधिक दूरी पर स्थित चिन्यालीसौड़ हवाई अड्डे पर अलग-अलग हिस्सों में पहुंची। इस योजना में ध्वस्त सुरंग के मलबे के बीच से एक अलग रास्ता खोदने के लिए मशीन का उपयोग किया जा रहा है ।

एक बार मार्ग साफ हो जाने पर, हल्के स्टील पाइप के 800-मिमी और 900-मिमी व्यास वाले खंड एक-एक करके स्थापित किए जाएंगे। इस प्रक्रिया के पूरा होने पर, मलबे के दूसरी तरफ फंसे कर्मचारी सुरक्षित स्थान पर रेंगने में सक्षम होंगे यद्यपि बचाव कार्य जारी है इस बीच कल, ताजा भूस्खलन के कारण बचाव अभियान में बाधा उत्पन्न हुई। बचाव टीमों ने ‘अमेरिकन ऑगर’ के लिए एक प्लेटफॉर्म बनाने में काफी समय लगा।
निर्माणाधीन सुरंग महत्वाकांक्षी चार धाम परियोजना का हिस्सा है, जो बद्रीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री के हिंदू तीर्थ स्थलों तक कनेक्टिविटी बढ़ाने के लिए एक राष्ट्रीय बुनियादी ढांचा बनाने की केन्द्र सरकार की पहल का हिस्सा है।, यद्यपि हिमालयी पहाडॉों की संवेगनशीलता को देखते हुवे ऐसे सुरंगों का पर्यावरणविद बिरोध कर चुके है, किन्तु सरकार ने राष्ट्रीय. सुरक्षा का मामला उठाकर बिरोध को ठंन्डे बस्ते में डाल दिया ।

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