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अल्मो़ड़ा इतिहास,संस्कृति एवं पुरातत्व विभाग, सोबन सिंह जीना विश्वविद्यालय द्वारा गणित विभाग के सभागार में अंतर्राष्ट्रीय सेमिनार का उद्घाटन हुआ। उद्घाटन सत्र पर कार्यक्रम के अध्यक्ष रूप में सोबन सिंह जीना विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर सतपाल सिंह बिष्ट, विशिष्ट अतिथि रूप में पद्मश्री डॉ यशोधर मठपाल (निदेशक लोक कला संग्रहालय,भीमताल), मुख्य अतिथि रूप में सुदूर पश्चिमी प्रदेश नेपाल के पूर्व मुख्यमंत्री राजेन्द्र सिंह रावल, विशिष्ट अतिथि रूप में प्रोफेसर ईश्वर शरण विश्वकर्मा (कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष, भारतीय इतिहास संकलन), आधार व्याख्याता के रूप में महादेवी वर्मा सृजन पीठ के पूर्व निदेशक प्रोफेसर देव सिंह पोखरिया, सेमिनार के संयोजक प्रोफेसर बी. डी.एस. नेगी,आयोजक सचिव डॉक्टर गोकुल देवपा आदि ने अंतरराष्ट्रीय सेमिनार का उद्घाटन किया।

सेमिनार के संयोजक प्रोफेसर वी. डी. एस. नेगी ने अतिथियों का स्वागत करते हुए कहा कि आई सी एच आर, भारतीय पुरातत्त्व सर्वेक्षण आदि के सहयोग से अंतरराष्ट्रीय सेमिनार का आयोजन किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि लोक नहीं होता तो कुछ नहीं होता। इसलिए हिमालयी लोक के विविध आयामों को इस सेमिनार में प्रस्तुत किया जाएगा।
इस अवसर पर विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर सतपाल सिंह बिष्ट ने कहा की इस सम्पूर्ण हिमालय में पारंपरिक चिकित्सा पद्धति के लिए अपार संभावनाएं हैं। हिमालय में मेडिशनल प्लांट को लेकर ज्ञान शोधार्थियों के बीच जानी चाहिए। उन्होंने आगे कहा कि लोक के विभिन्न आयामों का प्रसार एवं संरक्षण किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय में ऐसे सेमिनार होना गर्व की बात है। उन्होंने सभी आगंतुकों का स्वागत किया।
आधार व्याख्याता प्रोफेसर देव सिंह पोखरिया ने कहा कि हिमालयी भाषाओं ने विश्व को जोड़ा है। संस्कृति के विकास में भाषा प्रमुख स्थान रखती है। हिमालयी संस्कृति के निर्माण में भाषाओं का योगदान है। उन्होंने हिमालयी भाषा /बोलियों की समानता, एकता और संवैधानिक भाषाओं की स्थिति पर प्रकाश डाला। साथ ही फोक,आदिम एवं जन को स्पष्ट कर लोक पर प्रकाश डाला।
विशिष्ट अतिथि पद्मश्री डॉक्टर यशोधर मठपाल ने कहा- उत्तराखंड में लेखन परंपरा प्राचीन समय से विद्यमान रही है। वैदिक साहित्य के संरक्षण के प्रयास हों। उन्होंने हस्तकलाओं, लोक कलाओं के ऐतिहासिक पक्ष पर विस्तार से बात रखी। उन्होंने कहा कि लोक में विज्ञान समृद्ध है। जिसे संकलित किये जाने की जरूरत है। उन्होंने आगे कहा कि अर्जित विज्ञान,लोक विज्ञान के सामने फीका है।

विशिष्ट अतिथि प्रोफेसर ईश्वर शरण विश्वकर्मा ने हिमालयन फोक कल्चर विषयक सेमिनार की सराहना की और शुभकामनाएं दी।
मुख्य अतिथि रूप में सुदूर पश्चिमी प्रदेश नेपाल के पूर्व मुख्यमंत्री राजेन्द्र सिंह रावल ने अपनी भाषा, समाज, संस्कृति को लेकर आयोजित सेमिनार की सराहना की। उन्होंने अपनी संस्कृति को लेकर सजग रहने की बात कही। उन्होंने कहा कि हमारा इतिहास, संस्कृति, कला, खानपान बहुत समृद्ध है जिसे बचाये जाने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि आज इतिहास के पुनर्लेखन की आवश्यकता है।

इस अवसर पर महाराष्ट्र के पूर्व राज्यपाल माननीय भगत सिंह कोश्यारी ने ऑनलाइन रूप से उपस्थित होकर शुभकामनाएं दी।
पद्मश्री बसंती देवी ने उत्तराखंड को उत्कृष्ट बनाने के लिए कार्य करें। नशा मुक्त समाज बनाएं। उन्होंने कल्चर को बढ़ावा देने की बात कही।

आयोजक सचिव डॉक्टर गोकुल देउपा ने अंतरराष्ट्रीय सेमिनार में अतिथियों का आभार जताया।


सेमिनार का संचालन विद्वान प्रो एस.ए.हामिद ने किया। उन्होंने संचालित करते हुए हिमालयी लोक संस्कृति संबंधित सेमिनार की रूपरेखा प्रस्तुत की।
इस अवसर पर सेमिनार सोवेनियर एवं भारत के स्वाधीनता संग्राम में उत्तराखंड का योगदान पुस्तक का अतिथियों का लोकार्पण किया।

उद्घाटन सत्र प्रारंभ होने से पूर्व अतिथियों ने दीप प्रज्ज्वलित कर सरस्वती चित्र के समीप माल्यार्पण कर किया। आयोजकों ने अतिथियों को पुष्प कुछ देकर एवं शाल उड़ाकर सम्मानित किया। संगीत विभाग द्वारा संगीतमय प्रस्तुतियां दी गयी। इसके उपरांत उद्घाटन सत्र संचालित हुआ और उसके उपरांत तकनीकी सत्रों में तकनीकी सत्रों में विशेषज्ञों के निर्देशन में तकनीकी सत्र संचालित हुई जिसमें दर्जनों शोध पत्र पढ़े गए इस सेमिनार में कई देशों से शोधार्थी मौजूद रहे।

सेमिनार ऑनलाइन एवं ऑफलाइन मोड़ में संचालित हुआ।


इस अवसर पर डॉ आस्था नेगी, डॉक्टर लक्ष्मी वर्मा, डॉ रवि कुमार, डॉ प्रेम प्रकाश पांडे, डॉ रवींद्र नाथ पाठक, चंदन जीना, केतन तिवारी,माला, दीपक, सचिन, नरेंद्र , जीवन भट्ट, डॉ सुनील पंत, ने सेमिनार की व्यवस्थाओं में सहयोग किया।
इस अवसर पर प्रो चंद्रकला रावत, डॉ महेंद्र राणा (परीक्षा नियंत्रक, के यू नैनीताल), पद्मश्री बसंती देवी, पद्मश्री ललित पांडे, प्रो इला साह, प्रो सोनू द्विवेदी, प्रो शेखर चंद्र जोशी (अधिष्ठाता छात्र कल्याण) डॉ दीपक (कुलानुशासक),प्रो भीमा मनराल, डॉ धनी आर्या, प्रो ए एस अधिकारी, प्रो चंद्रकला रावत, डॉ शशि पांडे, डॉ शिवांगी चनियाल, डॉ देवेंद्र सिंह बिष्ट, डॉ जे सी दुर्गापाल, प्रो एस ए हामिद, प्रो एसएस पथनी, डॉ प्रीति आर्या, थ्रीस कपूर, डॉ हयात रावत, डॉ सबीहा नाज, प्रो हेम चन्द्र पांडे (निदेशक, पिथौरागढ़ परिसर), डॉ एसएस रावल, डॉ एस पी नेगी, डॉ विदुर चलीशे, डॉ मनोज सक्सेना, प्रो ए के नवीन, प्रो शालीमा तबस्सुम, डॉ पारूल सक्सेना, डॉ गिरजा शंकर पांडे, डॉ बचन लाल, लल्लन कुमार आदि के साथ विभिन्न संकायों के संकायाध्यक्ष, विभागाध्यक्ष, शिक्षक, शोधार्थी, विद्यार्थी उपस्थित रहे।

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