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जोशीमठ.20 जनवरी को आपदा प्रबन्धन के सचिव साहब ने जोशीमठ के विस्थापन पुनर्वास के संदर्भ में जनसुनवाई  की ।
इसमें कुछ चुनिंदा लोगों को ही बुलाया गया था  जोशीमठ बचाओं संघरष  समिति  नेता अतुल सती ने बताया कि  तमाम तरह की आशंका एवम खबरों के चलते 200 से ज्यादा लोगयहा पहुच हॉल खचाखच भर गया ..जो हॉल में न अटा सके वे बाहर खड़े हो खिड़की दरवाजों से सुनते रहे ।
इस तरह बैठक एक तरह की जनसुनवाई जैसी हो गई ।

उन्होंने कहा है कि  व्यवस्थित या उचित (proper ) जनसुनवाई होनी अभी बाकी है । उससे पहले सामाजिक प्रभाव आंकलन सर्वेक्षण (social impact assessment survey) होना जरूरी है । जो कि अभी नहीं हुवा है लोगों ने इस मुद्दे को ।बैठक में उठाया ।
लोगों ने कहा कि पुनर्वास जरूरी है लोगों सरकार के प्रस्ताव को एक सिरे से नकार दिया ।
बैठक में लोगों के बहुत से सवाल थे ..
इनमें एक सवाल यह भी आया कि नरसिंह मंदिर का क्या होगा .?

जोशीमठ का प्रसिद्ध नरसिंह मंदिर ..जोशीमठ की पहचान है .और बद्रीनाथ के कपाट बन्द होने पर जहां छ: माह बदरीनाथ की पूजा की परम्परा भी है ..और पट खुलने पर भी ..यात्री बदरीनाथ से पूर्व नरसिंह मंदिर जाते हैं ..इसके अलावा यह कुमाऊं क्षेत्र के लोगों की भी आस्था का बड़ा केंद्र है ..जहां से हर साल लोग पूजा हेतु आते हैं ।

सचिव की तरफ से कहा गया कि ..मंदिर को बचाने के पूरे प्रयास किए जाएंगे .. लोगों ने सवाल किया कि जब दोशीमठ नही बचाया जा सकता तो नरसिंह मन्दिर कैसे बचाया जा सकता है लोगों का कहना है कि
यह भी जुमला है अतुल सती के अनुसार . मंदिर को बचाने के पूरे प्रयास किए जाएंगे ..बड़ी चर्चा में है .!
क्योंकि जिन लोगों की वजह से मंदिर का अस्तित्व है ..उनके बारे में यह एक बार भी नहीं कहा गया ।कि उनको बचाने का प्रयास किया जायेगा
लोगों को किस तरह यहां ही अपनी जन्मभूमि में बचाया जाए ..इस पर कोई प्रयास की बात नहीं हुई है ।

सर्वे रिपोर्ट के अनुसार जब 80 फीसद लोग ही यहां नहीं रहने वाले हैं इस पर अतुल सती ने कहा कि (सरकार की योजना अनुसार इनका बिस्थापन कहा होगा , यह योजना कैसी सफल होगी अभी देखने की बात है उनका कहना है कि ..जिन्होंने मंदिर बनाया.. बाचाया..जब लोग ही नही होंगे तो तब उस मंदिर को किसके लिए बचाएंगे .? मंदिर तो लोग जहां रहेंगे वहां बना ही लेंगे .!

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