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अल्मोड़ा वातावरण परिवर्तन पर हुई कार्यशाला के द्वितीय दिवस एस एस जे यू के अल्मोड़ा परिसर मे सेमिनारमें ऑनलाइन एवं ऑफलाइन रूप से सत्र संचालित हुए। दूसरे दिन के प्रथम सत्र के सत्र के रिसोर्स पर्सन के रूप में जी. बी. पन्त पर्यावरण संस्थान, कोसी कटारमल के वैज्ञानिक डॉ. जे. सी.कुनियाल रहे और सत्र अध्यक्ष डॉ. बलवंत कुमार ने की। इस सत्र में रेपोर्टियर रूप में अर्चना कांडपाल और सीमा रही। द्वितीय तकनीकी सत्र में प्रोफेसर रुबीना अमान, डॉ पारुल सक्सेना, डॉ प्रतिभा फुलोरिया ने अध्यक्षता एवं निर्णायक की भूमिका निभाई। इस सत्र में रेपोर्टियर मुक्ता मर्तोलिया रहीं। उसके बाद समानांतर रूप से संचालित हुए तृतीय सत्र (ऑनलाइन) में सत्र अध्यक्ष रूप में डॉक्टर देवेंद्र सिंह बिष्ट और सह अध्यक्ष डॉ.डी. एस. धामी और डॉ.आर.एन. पाठक और डॉ. नवीन चन्द्र रहे। रेपोर्टियर रूप में नेहा पंतोला ने सहयोग दिया।
प्रथम सत्र में अध्यक्षता करते हुए वैज्ञानिक डॉ जे.सी. कुनियाल ने अपने उद्बोधन में वातावरण में एयरोसोल के स्तर पर बात रखी। उन्होंने कहा कि वातावरण में परिवर्तन होने से ऋतुओं का चक्र, प्री मानसून की घटना हो रही है। उन्होंने कहा कि वातावरण प्रदूषित हो रहा है। वनाग्नि के बढ़ने से ब्लैक कार्बन उत्सर्जित हो रहा है जिससे क्लाइमेट चेंज हो रहा है। हमें समुदाय के सहयोग से वनाग्नि को रोकना होगा। उन्होंने आगे कहा कि जी. बी. पंत संस्थान द्वारा तकनीकों के माध्यम से वातावरण में प्रदूषण को मापने के लिए यंत्र स्थापित किये हैं। यह संस्थान सोबन सिंह जीना विश्वविद्यालय के साथ मिलकर इस दिशा में सहयोग देगा।
द्वितीय सत्र अध्यक्ष डॉ देवेंद्र सिंह बिष्ट ने जलवायु परिवर्तन को एक अति महत्वपूर्ण एवं ज्वलंत विषय बताया। उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन का पर्वतीय क्षेत्रों में नकारात्मक प्रभाव पड़ा है। निरन्तर पर्यावरण में गिरावट दिखाई दे रही है। इस दिशा में गंभीरता से सोचने की आवश्यकता है। उन्होंने वैज्ञानिकों एवं शोधार्थियों के शोध अध्ययनों को गंभीरता से लेने की आवश्यकता है।

समापन सत्र

तकनीकी सत्रों के उपरांत सेमिनार का समापन सत्र आयोजित हुआ जिसमें मुख्य अतिथि के रूप में प्रो भीमा मनराल, प्रो रुबीना अमान, डॉ पारुल सक्सेना, सेमिनार संयोजक डॉ धनी आर्या, सह संयोजक डॉ बलवंत आर्या,उपस्थित थे।
समापन सत्र की मुख्य अतिथि प्रो भीमा मनराल ,(संकायाध्यक्ष, शिक्षा संकाय) ने कहा कि पर्यावरण के विभिन्न दृष्टिकोण से वैज्ञानिकों/शोधार्थियों आदि ने सेमिनार में शोध प्रस्तुतिकरण किया है। इससे बेहतर दिशा में कार्य करने के लिए प्रेरणा मिलेगी। उन्होंने सेमिनार के संयोजक/संयोजक/आयोजकों को बधाइयाँ दी। उन्होंने कहा कि पर्यावरण के लिए संवेदनशील होना पड़ेगा,अन्यथा जीवन बहुत कष्टमय हो जाएगा। पेड़ों को नहीं काटें।
प्रो रुबीना अमान ने कहा कि पर्यावरण के संरक्षण के लिए जागरूक होना होगा। मानवजनित नुकसान को समझना होगा।
प्रकृति के साथ खिलवाड़ के भयावह परिणाम देखने होंगे।
सेमिनार के सह संयोजक डॉ बलवंत कुमार ने समापन सत्र पर अतिथियों का स्वागत किया। साथ ही उन्होंने कहा कि इकोलॉजी और पर्यावरण के विभिन्न विषयों पर मंथन हुआ है जो पर्यावरण असंतुलन को समझने एवं उसके निदान के लिए महत्वपूर्ण हुआ है। उन्होंने कहा कि पर्यावरण आदि को लेकर शोधपत्रों का वाचन हुआ।

सत्र में आभार जताते हुए सेमिनार के संयोजक डॉक्टर धनी आर्य ने बताया कि NSERB India के सहयोग से दूसरे दिन भी अंतरराष्ट्रीय सेमिनार, वनस्पति विज्ञान विभाग में संचालित हुए तकनीकी सत्रों में जलवायु परिवर्तन में तकनीकी उपयोग, जलवायु परिवर्तन एवं पर्यटन, आर्थिक स्थिति, मत्स्यिकी, टेक्सोनोमी, पादप रोग,हिमालयी प्रवर्जन, जलवायु परिवर्तन एवं co2, मध्य हिमालय के ग्रामीण क्षेत्रों में जलवायु परिवर्तन, पारम्परिक ज्ञान, एग्रो बायो-डायवर्सिटी, ओसालोट्रोफिक पादपों की भूमिका, एग्रो-मिल्क फार्मिंग, सॉयल मैकॉफ्लोरा, पर्यटन एवँ पर्यावरण संवेदनशीलता, इनवेसिव प्लांट, चिकित्सकीय पौधों, शैवाल एवं नदियों का बहावक्षेत्र, धतूरा प्लांट से कैल्शियम की दवा, अग्निहोत्र एवं पर्यावरण आदि को लेकर डॉ. एम. के. बिष्ट, डॉ. दीपक कुमार टम्टा, डॉ. तेजपाल सिंह, डॉक्टर अभिमान कुमार झा, एस.एन.ओझा, डॉ भारती, डॉ गीतांजलि मिश्रा, डॉ दीपक कुमार, डॉ विजय आर्या आदि सहित दर्जनों शोधार्थियों ने शोध पत्र पढ़े।
उत्कृष्ट शोधपत्र के रूप में फैकल्टी डॉ पारुल सक्सेना और शोधार्थी जोया साह को पुरस्कृत किया गया।
सेमिनार में आयोजक सचिव डॉ मंजुलता उपाध्याय ने संचालन किया।
सेमिनार में आयोजक सचिव डॉ रवींद्र कुमार, डॉ नवीन चंद्र, डॉ रवींद्रनाथ पाठक, नेहा जोशी, आँचल रानी, लक्ष्मी नेहा पंतोला, पूजा बिष्ट, भावना पांडे, महिमा गडकोटी, मुक्ता मर्तोलिया, अर्चना कांडपाल, सीमा चतुर्वेदी, जोया साह, हिमानी तिवारी, रमेश, सुनील आदि ने व्यवस्थाओं के संचालन में सहयोग दिया।
इस अवसर पर डॉ प्रीति आर्या, प्रो सोनू द्विवेदी (संकायाध्यक्ष दृश्यकला), डॉ नंदन सिंह बिष्ट,डॉ संदीप कुमार, डॉ भुवन चंद्रा, डॉ राम चन्द्र मौर्या, डॉ श्वेता चनियाल, डॉ राजेश राठौर, डॉ राजेन्द्र जोशी, डॉ लता आर्या, डॉ तेजपाल सिंह, रवि कुमार,मनोज आदि के साथ एम.एससी के विद्यार्थी, शोधार्थी एवं शिक्षक शामिल हुए।

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