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भारत सरकार के वित्त मंत्रालय के MSME के‌ नए नियमों की वजह से उधारी वाले मार्केट में हड़कंप मचा है एम एस एम इ भारत सरकार के उन उद्योगों को प्रोत्साहित करता है जो लघु या सुक्ष्म उद्योगों को प्रोत्साहित करते है , पाच करोड तक के चप्नओभर वाले उद्योग लघु उद्योगो मे आते है ।अब सरकार ने इनके लिये नये नियम बनाये है ।ब्यापारियों को इनकी उधारी मार्च तक निपटाना अनिवार्य होगा । नये नियम के अनुसार उधारी मे माल खरीदकर ब्यापार करने वालो को मार्च मे बित्तीय वर्ष पूर्ण करने से पहले उधारी का भुगतान करना अनिनार्य होगा । यदि ब्यापारी उधारी 45दिन के भीतर नही चुकाते तो , उधारी को ब्यापारियों की इनकम मे जोड़कर चैक्स का निर्धारण होगा ,इसके बाद बड़ी संख्या ंे लघु ब्यापारी आर्डर केन्सिल कर रहे है

यदि मोदी सरकार इन नए नियमों को कड़ाई से लागू करती है भारत में व्यापारियों में हड़कंप मचनातय है। इस नए नियम के तहत व्यापारियों को उधार मे लिये वस्तुओं का मूल्य 45 दिन में चुकाना जरूरी कर दिया गया है। इस नियम की वजह से मार्च से पहले पेमेंट देना जरूरी होने की वजह से व्यापारियों ने भी अपनी खरीददारी को कम कर दिया है या खरीददारी पर रोक लगा दी है पूरी तरह से रोक दी है, इसका असर कपड़ा मार्केट, ज्वैलरी मार्केट जैसे लंबी उधारी वाले व्यवसाय में पड़ रहा है।

ब्यापारियों का कहना है कि इस नए नियम की वजह से कपड़ा मार्केट, ज्वैलरी मार्केट जैसे होलसेल व्यापारी की सेल एकदम कमजोर होने की वजह से पूरी चेन ही रूक गई है। किन्तु इसका लाभ बड़े -बड़े मौल जरूर उठा रहे है 31 मार्च से पहले पेमेंट देने के चक्कर में रिटेल कस्टमर ने अपनी खरीददारी कम कर दी।, क्योंकि रिटेल सेक्टर भी एकदम कमजोर है। रिटेल में कहीं कोई कस्टमर नजर नहीं आ रहा है। ब्यापारी बता रहे है कि कुछेक जगह ही कस्टमर नजर आ रहे हैं। अब तो हालात ये है कि दुकान के खर्चे निकालना भी भारी हो रहा है। यदि ब्यापारी उधारू का पैसा 45 दिन मे नहू चुकातेतो इसे उनकी आय माना जायेगा जिस पक उन्हे 30% आयकर देना होगा ।

इस नए नियम की वजह से छोटे व्यापारियों पर जोरदार असर पड़ने की संभावना है। इससे जहां छोटे व्यापारी खत्म हो जाएंगे वही बडे ब्यापारियों को लाभ होंगा । इसका रिचेल बाजार में भी जबरदस्त असर पड़ेगा। रिलेट ब्यापारी यह संभावना जता रहे है कि कहीं ऐसा ना हो कि पेमेंट के चक्कर में व्यापारी माल वापसी करने लग जाए। नए नियमों की वजह से अभी व्यापारी भाईयों के लिए बहुत ही तकलीफ वाला समय है।

ब्यापारी मांग कर रहे है कि भारत सरकार को इस नए नियम में संशोधन करना चाहिए, जिससे व्यापार पहले जैसा चलता रहे।

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