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अल्मोड़ा लोक संस्कृति के पुरोधा यशोधर मठपाल ने एस एस जे यू के अल्मोड़ा परिसर मे आयोजित हिमालया का फोक कल्चर बिषय पर आयोजित सेमिनार मे अपना बक्तब्य देते हुवे कहा कि लोक संस्कृति  के परम्परागत ज्ञान किताबी ज्ञान से ज्यादा महत्वपूर्ण है ।उन्होने कहा कि एक पुरातात्विक खुदाई के दौरान  उन्हें एक मिट्टी के पात्र मे बराबर साईज के गोल गोल छेद मिले साढे तीन हजार  साल पुराने इस पात्र में तत्कालिक लोंगों ने इतने सुन्दर कलात्मक आकार के छेद कैसे बनाये होंगे यह जानकारी जुटाने मे कई माह ब्यतीत हो गये , जब समाधान नही मिला तो कलाकृति को कुम्हार के पास ले जाया गया ,तब कुम्हार बोला इसमे क्या कठिनाई है इसे हम अभी तैयार कर देते है उसने मिट्टी के गीले पात्र मे सरसों के दाने लगा दिये जब पात्र को आग मे पकाया गया तो तो सरसों के दाने जल गये पात्र में छेद उभर आये उन्होंने कहा कि वेदिक युग मे जो शिल्पी का महत्व था , वह आज के समय मे नही है । किन्तु पश्चिम ने इसे फिर से महत्व प्रदान किया ।

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