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अल्मोड़ा निवासी अशोक उप्रेती को शिक्षाशास्त्र विषय में कुमाऊं विश्विविद्यालय नैनीताल द्वारा पी०एच-डी० (डॉक्टरेट) की उपाधि प्रदान की गई। श्री लालबहादुर शास्त्री राष्ट्रिय संस्कृत केंद्रीय विश्वविद्यालय नई दिल्ली से बाह्य परीक्षक के रूप में आए हुए प्रो० आर० पी० पाठक जी द्वारा यह मौखिक परीक्षा संपन्न कराई गई। इनके शोध का विषय “इंप्लीमेंटेशन स्टेट्स ऑफ़ इंक्लूसिव एजुकेशन इन एलिमेंट्री स्कूल ऑफ उत्तराखण्ड एंड स्टडी ऑफ़ नॉलेज एंड एटीट्यूड ऑफ़ एलिमेंट्री स्कूल टीचर्स टुवर्ड्स इंक्लूसिंव एजुकेशन” था। इन्होंने अपने शोध के निष्कर्ष में कहा कि सीखने और बौद्धिक अक्षमता वाले बच्चों के लिए बेसिक शिक्षा के क्षेत्र में सुधारात्मक कदम उठाए जाने की जरूरत हैं। उन्होंने कहा कि समावेशी शिक्षा लर्निंग डिसेबिलिटी वाले बच्चों के प्रति व्यवहार संबंधी बाधा और प्रचलित रूढ़िवादिता को मिटाने का शानदार तरीका है। इन्होंने अपना शोध कार्य सोबन सिंह जीना विश्वविद्यालय,अल्मोड़ा के शिक्षा संकाय की संकायाध्यक्ष और विभागाध्यक्ष प्रो० भीमा मनराल के निर्देशन में संपन्न किया। इससे पूर्व अशोक उप्रेती यू०जी०सी० नेट और यू-सेट० की परीक्षा भी उत्तीर्ण की है और विगत दस वर्षों से शिक्षक शिक्षा के क्षेत्र में कार्यरत है। वर्तमान में वह डी०एस०बी०परिसर, नैनीताल के एकीकृत शिक्षक शिक्षा कार्यक्रम विभाग में बतौर अतिथि शिक्षक के रूप में कार्यरत हैं। अशोक उप्रेती ने अपनी सफलता का श्रेय अपने माता-पिता, गुरुजनों और परिवार के सदस्यों को दिया।
इस अवसर पर कुमाऊं विश्विविद्यालय के कुलपति प्रो० दीवान सिंह रावत, शिक्षा संकाय के संकायाध्यक्ष और संरक्षक प्रो० अतुल जोशी,सूचना वैज्ञानिक प्रो० युगल जोशी, शिक्षा संकाय के विभागाध्यक्ष डॉ० भूपेश चंद्र पंत, डॉ० सरोज शर्मा, डॉ० पुष्पा अधिकारी, डॉ० जीवन उपाध्याय, विनिता विश्वकर्मा, लक्ष्मण सिंह, शिखा रतूड़ी, वर्षा पंत, आकांक्षा शैली, तेज प्रकाश जोशी, दीपिका भट्ट, हरीश कुमार, सुमन आदि ने उन्हें बधाई दी।

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