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अल्मोड़ा , वरिष्ट लेप्रोस्कोपिक जर्नल सर्जन अमित सुकोटी ने कहा कि आने वाले दिनों मे भारत में भी सर्जरी के क्षेत्र मे एक विशेष सुविधा जुडने जा रही है उन्होंने रोवेटिक सर्जरी की जानकारी देते हुवे बताया कि कि अब यह सर्जरी भारत मेंभी सुलभ होंगी , अल्मोड़ा जिला चिकित्सालय मे कई जटिल आपरेशन कर चुके डा़ अमित सुकोटी ने कहा कि यदि उपकरण व एडवान्स एनेथीसिया की सुविधा हो तो 90% सर्जरी यहां सम्भव है लेप्रोस्कोपी मशीन उपलब्ध होने पर यह सुविधा आम लोगो को दी जा सकती है । उन्होंने बताया कि सर्जरी के लिये सामान्यत: लोग बाहर का रूख करते है । जिसके लिये उन्हे भारी ब्यय करना पड़ता है अब जिला चिकित्सालय में यह सुविधा है ।
डा. अमित सुकोटी ने कहा कि अभी तक चिकित्सा में प्रयोग होने वाले सभी रोबोट बाहरी देशो से आयात किये जाते है। ड़ा सुकोटी ने बताया कि वे अस्पताल में अक्टूबर 2021 में तैनात हुवे। तब से यहां पर बहुत सर्जरी कर चुके है उन्होंने सर्जरी के तौर तरीकों पर प्रकाश डालते हुवे तहा कि वर्तमान में सात तरीके की सर्जरी होती है, गर्दन से नीचे की। जिसमें हम स्पाइनल में सर्जरी करते हैं। जिसमें हर्नियां, अपेंडिक्स‌ व अन्य सभी सर्जरी की जाती है। इससे मरीजों को एक सुविधा यह मिल जाती है कि उनका आयुष्मान कार्ड से निशुल्क ऑपरेशन किया जाता है। साथ ही अब मरीजों को दूर शहरों की दौड़ नहीं लगानी पड़ती है, अब यह सब सुविधाएं यहां उपलब्ध हो जाती है। जब मरीज यहां आते हैं और लगता है वह आगे जाएं तब ही उन्हें भेजा जाता है। वैसे 90% सर्जरी यहां की जाती है।

डॉ अमित सुकोटी ने कहा कि अब तक पित्ताशय के जो जटिल आपरेशन हल्द्वानी में ही हो पाते थे, अब जिला अस्पताल में उपलब्ध है। पित्ताशय ( Gall bladder) की नली में पथरी जो होती है उसका भी ओपन विधि द्वारा ऑपरेशन हो रहे हैं। इसके अलावा हर्नियां में जो जटिल समस्याएं होती हैं,उसका भी ऑपरेशन अब उनके माध्यम् से जिला चिकित्सालय मे हों रहे हैं। इसके अलावा डा अमित सुकोटी दूरबीन विधि से भी ऑपरेशन कर सकते है पर अल्मोड़ा चिकित्सालय मे दूरवीन उपलब्ध नही है । , जिसके लिए मांग की गई है है। यदि यहां दूरबीन आ जाएगी तब हम मरीजों को वह सुविधा उपलब्ध कराएंगे। उन्होंने कहा कि अगर मरीजों के पास आयुष्मान कार्ड है तो सभी उपचार निशुल्क होते है। इसके अलावा आयुष्मान कार्ड नहीं है तो मेजर खर्चा आता है। जिसमें 2,500 तक खर्चा आता है। इसके लिए दूरबीन होनी चाहिए। जो अभी यहां नहीं है।

डॉ अमित सुकोटी ने बताया कि अस्पताल में हमें सभी सुविधाएं उपलब्ध हैं। पर यदि दूरबीन‌ और जनरल एनेस्थीसिया की सुविधा हो । तो मरीजों को हमें बाहर‌ ऑपरेशन के लिए नहीं भेजना पड़ेगा। 99% ऑपरेशन यही किए‌ जाएंगे। इसके अलावा लैब आने से भी हम बहुत सी बीमारियों का पता लगा सकते हैं। जिसमें बच्चे दानी निकालने की सुविधा भी उपलब्ध करा सकते हैं।

डॉ अमित सुकोटी-ने बताया दूरबीन विधि के चार या पांच रीजन होते हैं। जिसमें पहला है कास्मेटिक- जहां इलाज में बड़ा चीरा लगता है और बहुत से टांके लगाए जाते हैं। वहीं दूरबीन में बस एक टांका लगाया जाता है। जो‌‌ महिलाओं व पुरूषों के लिए अच्छा है। दूसरा है हास्पिटल स्टे- जहां ऑपरेशन करके चीरा लगाकर मरीजों को अस्पताल में एक हफ्ता रहना पड़ता है। वहीं दूरबीन विधि से ऑपरेशन में मरीजों को घर भेज दिया जाता है। ऑपरेशन में दर्द बहुत होता है। दूरबीन विधि में कम दर्द होता है। इन वजह से यह चलन में आई है। लैब की सुविधा होने से मरीजों के लिए यह फायदेमंद होगा। इसके अलावा बवासीर का ऑपरेशन करने के लिए गन की जरूरत होती है। तो अभी उपलब्ध नहीं है। वो सुविधा उपलब्ध होगी तो मरीजों के लिए यह सुविधा भी उपलब्ध हो जाएगी।

एक सवाल के जबाब में डॉ अमित सुकोटी ने कहा कि उपकरण होंने पर यह सब सुविधाएं हम मरीजों को उपलब्ध कराएंगे। अभी मुझे यहां एक साल हुआ है। जिसमें मैं अभी तक 200 से अधिक मेजर सर्जरी कर चुका हूं। इसके अलावा एक हजार से ज्यादा माइनर सर्जरी कर चुका हूं। जिसमें बच्चों की सर्जरी भी शामिल हैं। इससे पहले दस साल के बच्चों को बाहर भेजा जाता था ऑपरेशन के लिए। लेकिन मैंने नौ साल के बच्चे का बीपीएल कार्ड में ऑपरेशन किया है। वो भी दस मिनट तक में। वो भी 2.5 सेमी चीरे से। इससे पहले वह कई अस्पतालों में गया हर्नियां ऑपरेशन के लिए। जिसमें 2000- 45000 ऑपरेशन चार्ज था। लेकिन मैंने यहां उसका निशुल्क बीपीएल कार्ड में ऑपरेशन किया।

डॉ अमित सुकोटी ने संजय पाण्ड़े को बताया कि माइनर सर्जरी के लिए मैंने खुद से माइक्रो उपकरण लिए है। बड़े उपकरण बहुत ज्यादा महंगे हैं जो पाॅसिबल नहीं था। मरीजों की सेवा के लिए छोटे उपकरण लिए हुए हैं।

रोनोटिक सर्जरी के विषय में डॉ अमित सुकोटी- ने कहा कि रोवोटिक सर्जरी में उनकी फैलोशिप है व डिप्लोमा है। उम्होंने लेब्रोस्कोपिक भी किया हुआ है। रोबोटिक सर्जरी में फैलोशिप की हुई है। बहुत जल्दी हमें खुशखबरी मिलने वाली है। अक्टूबर में इंडिया अपना खुद का रोबोट लांच करने वाला है। रोबोट की सर्जरी बहुत मंहगी होती है। इसलिए हम इतने आगे‌ नहीं जाते हैं। रोबोट से सर्जरी महंगी होने का एक कारण यह है कि हमें रोबोट बाहर से खरीदने पड़ते हैं। जो 25-30 करोड़ के होते हैं। इंडिया में जो‌‌ रोबोट चल रहा है वह 9th जेनरेशन है। एक डाॅक्टर है आकाश‌ शर्मा, जो मेरे मेंटोर है। वो एक रोबोट लांच कर रहे‌ है। जब यह आ जाएगा तो हमें जगह जगह यह रोबोट उपलब्ध हो‌ जाएंगे। जो 25-23 लाख में उपलब्ध हो जाएगा। तब उस समय पर हम रोबोटिक सर्जरी कर सकते हैं।

सामाजिक कार्यकर्ता संजय पांडे का कहना है की यह हमारे लिए बहुत सौभाग्य की बात है कि अमित सुकोटी जी जैसे काबिल सर्जन हमारे शहर में अपनी सेवाएं दे रहे है खास बात यह है कि वे पहाड़ में रहकर ही यहाँ के लोगों की चिकित्सा सेवा करना चाहते है,अस्पताल प्रबंधन को उनको आवश्यकीय उपकरण उपलब्ध करवाने चाहिए इस संबंध में वे जिलाधिकारी से भी मुलाकात करेंगे।

संजय पाण्ड़े की रिपोर्ट

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