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अल्मोड़ा देश के जाने माने सेवानिबृत कृर्षि एवम् पर्यावरण वैज्ञानिको ने गौसदन ज्योली पहुच कर जैविक खेती व पशुचारा विकास की संम्भावनाओ विचार विमर्श किया इस अवसर पर वैज्ञानिकों का स्वागत करते हुवे गौ सेवा न्यास के संस्थापक व सचिव दयाकृष्ण काण्डपाल ने वैज्ञानिको का स्वागत करते हुवे कहा कि गौशाला गौमूत्र व गौबर से होने वाले लघु उद्योग व हरे चारे समस्या का समधान बड़ी चुनौती है , ।यदि गौमूत्र व गोवर आधारित उद्योगो से किसानो को आर्थिक लाभ सम्भव हुवा तो आवारा गौवंश की समस्याओ का समाधान हो सकेगा । वरिष्ट वैज्ञानिक डी आर डी ओ एग्रीकल्चर के सेवानिबृत संस्थापक निदेशक एम एम सी जोशी , डी आर जी ओ के सेवानिबृत वरिष्ट वैज्ञानिक रमेश जोशी पर्यावरणविद प्रो कृष्णमूर्ति ने इस सम्बन्ध मे गहन बिचार विमर्श किया , इस अवसर पर तमिलमाडु चेन्नई से पहुचे डा कृष्णमूर्ति ने चारा उत्पादन मे पन्चगब्य के महत्व पर प्रकाशडालते हुवे कहा कि पन्चगब्य एक जैविक खाद है ,व भूमि उपचार की बिधा है । इसका खेती व चारे मे उपयोग करने से जहां मानवीय श्रम कम होगा वही वही उत्पादन अधिक होगा उन्होंने कहा कि पन्चगब्य से कुछ अन्य जडी बूटी मिलाकर जैविक कीटनाशक भी तैयार किया जा सकता है , उन्होंने इस अवसर पर पन्चगब्य बनाने की बिधि भी बताई ।

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