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🔹जल चिकित्सा🔹

🧋जीरा जल🧋

🔹एक लीटर पानी में एक से डेढ़ चम्मच जीरा डालकर उबालें । जब 750 ग्राम पानी बचे तो उतारकर ठंडा कर छान लें । यह जल शीतल गुणवाला है । वायु तथा पित्तदोष से होने वाले रोगों में यह अत्यधिक हितकारी है । गर्भवती एवं प्रसूता स्त्रियों के लिए तो यह एक वरदान है । जिन्हें रक्तप्रदर का रोग हो, गर्भाशय की गर्मी के कारण बार-बार गर्भपात हो जाता हो अथवा मृत बालक का जन्म होता हो या जन्मने के तुरंत बाद शिशु की मृत्यु हो जाती हो, उन महिलाओं को गर्भकाल के दूसरे से आठवें मास तक नियमित जीरा-जल पीना चाहिए ।

🔹एक-एक दिन के अंतर से आनेवाले, ठंडयुक्त एवं मलेरिया बुखार में, आँखों में गर्मी के कारण लालपन, हाथ, पैर में जलन, वायु अथवा पित्त की उलटी (वमन), गर्मी या वायु के दस्त, रक्तविकार, श्वेतप्रदर, अनियमित मासिक स्राव गर्भाशय की सूजन, कृमि, पेशाब की अल्पता इत्यादि रोगों में इस जल के नियमित सेवन से आशातीत लाभ मिलता है । बिना पैसे की औषधि…. इस जल से विभिन्न रोगों में चमत्कारिक लाभ मिलता है ।  साभार -आर्य सत्यनारायण शास्त्री

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