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गुजरात के कठियाबा़़ जनपद मे रहने वाले सन्त प्रह्लाद जानी का निधन हो गया लगभग  76 वर्षो  तक बिना खाये पे जिन्दा रहे । देश विदेश की कई वैज्ञानिक संस्था प्रह्लाद जानी   पर अनुसंधान करती रही पर कोई निष्कर्ष नही निकाल सकी । भारतीय रक्षा अनुसंधान परिषद ने प्रह्लाद जानी को बिना भोजन दिये  कई दिनों तक एक ऐसे कमरे में रखा जहां भोजन की कोई ब्यवस्था नही थी , वे सी सी टी वी कैमरो की निगरानी मे रहे । वैज्ञानिकों ने पाया कि वे उस दौरान भी सामान्य जीवन जीते रहे । प्रह्लाद जानी कहते थे कि उन्होंने महामाया से बरदान प्राप्त किया कि उन्हें कभी भी भूख ना लगे ।  नास्तिकों रे लिये भी प्रह्लाद जानी एक चुनौती बनकर उभरे , ।

  दुनिया भर की कई संस्थाओं ने उन पर अनुसंधान किये कई बार उनकी किटनी व लीवर की जांच की  जाती रही । पर सब कुछ सामान्य पाया गया रक्षा क्षेत्र में काम करने वाली संस्थाये  यह  उच्च हिमालयी क्षेत्रों या रेगिस्तान में जहां भोजन एक चुनौती बन जाता है , सैनिकों को प्रह्लाद जानी की तरह बिना खाये पिये फौलादी बनाना   चाहती थी , ।

प्रह्लाद जानी ने जीवन में ना तो कोई आश्रम बनाया ना ही सम्पत्ति इतत्रित की ।  एक सामान्य जीवन जिया ।