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अल्मोड़ा 18 मई जिलाधिकारी वंदना की अध्यक्षता में वनाग्नि रोकथाम एवं जिला गंगा समिति की बैठक नवीन कलेक्ट्रेट में आयोजित की गई। सर्वप्रथम वानाग्नि रोकथाम के बारे में चर्चा की गई जिसमे प्रभागीय वनाधिकारी महातिम यादव ने प्रजेंटेशन के माध्यम से जनपद में वानाग्नि की घटनाओं एवं आंकड़ों का प्रस्तुतीकरण दिया। इस दौरान प्रभागीय वनाधिकारी ने बताया कि पिछले वर्षों की अपेक्षा जनपद में जंगल की आग की घटनाओं की संख्या कम रही है। उन्होंने आग पर काबू पाने एवं वानाग्नि की रोकथाम करने के अपने अनुभवों को साझा किया। बैठक में जिलाधिकारी ने निर्देशित करते हुए कहा कि बीट लेवल समेत सभी स्तर की बैठकों में संबंधित क्षेत्र के महिला मंगल दलों, युवक मंगल दलों एवं स्वयं सहायता समूहों को अनिवार्य रूप से बैठक में प्रतिभाग करने के लिए आमंत्रित किया जाए, जिससे बैठक में लिए निर्णय एवं तैयारियों की जानकारी उन्हें मिल सके। साथ ही सभी दलों के सुझाव लेकर उन सुझावों पर भी काम किया जाए।
उन्होंने मावे गांव में बढ़ने वाली वानाग्नि की घटनाओं पर चिंता जाहिर कर संबंधित अधिकारियों को आग की घटनाओं में शामिल व्यक्तियों की पहचान कर सख्त कार्रवाई करने के भी निर्देश दिए। साथ ही कहा कि दर्ज मुकदमे को पुलिस को सौंपकर इस पर कारवाई की जाए। उन्होंने निर्देश दिए कि प्रति 15 दिन में रेंजर स्तर के अधिकारी भी आग प्रभावित क्षेत्र का लगातार दौरा करें। साथ की उन्होंने कहा कि टारगेटेड एरिया में स्थानीय लोगों के साथ समय समय पर गोष्ठियों का भी आयोजन किया जाए।
जिला गंगा समिति की बैठक में जिलाधिकारी ने गंगा समिति के कार्यों एवं समिति बनाने के उद्देश्यों के बारे में बताया। उन्होंने बताया कि गंगा एवं गंगा की सहायक नदियों के किनारे बसे हुए गांव एवं शहरों में गंगा समिति नदियों एवं जल स्रोतों की प्रदूषण से सुरक्षा करने का कार्य करे जिसमे कूड़ा उठान एवं इसका निस्तारण बेहतर ढंग से हो। उन्होंने कहा कि जल स्रोतों के किनारे बसे गांव एवं शहरों से उत्पन हुए वेस्ट को जल स्रोतों में जाने से रोकने का कार्य किया जाए।
जिलाधिकारी ने निर्देश दिए की प्रथम चरण में कोसी, राम गंगा, गगास एवं सुयाल नदियों के लिए कार्ययोजना बनाई जाए। उन्होंने कहा कि चिन्हित नदियों की स्वच्छता बनाए रखते हुए नदी एवं जल स्रोतों के पास कूड़े के ढेर एवं कचरे के स्रोतों का सर्वेक्षण कर अगली मीटिंग में उसके आंकड़े प्रस्तुत किए जाए तथा नदियों के किनारे पड़े हुए कचरे, पालस्टिक बॉटल का उठान किया जाए। साथ ही उन्होंने डोर टू डोर कूड़ा उठान पर जोर देते हुए कहा कि शहर एवं गांव को डस्टबिन फ्री बनाने के लिए कचरे का डोर टू डोर कलेक्शन करते हुए उसे निर्धारित ट्रेंचिंग ग्राउंड में ही निस्तारित किया जाए। उन्होंने जलस्रोतों को प्रदूषित करने वाले तत्वों के खिलाफ सख्त कारवाई करने के भी निर्देश दिए। साथ ही उन्होंने गंगा एवं उसकी सहायक नदियों के किनारे बसे लोगों की अर्थव्यवस्था को भी नदियों से जोड़ने पर काम करने के निर्देश दिए। कहा कि मछली पकड़ने की अवैध गतिविधियों पर भी नजर रखी जाए।
बैठक में डीएफओ महातीम यादव, अपर मुख्य अधिकारी केएस खाती, स्याही देवी विकास समिति के अध्यक्ष हरीश बिष्ट समेत अन्य अधिकारी मौजूद रहे।