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विश्वभर मे प्रसिद्ध बूकर पुरुष्कार पहली बार किसी भारतीय लेखिका को मिला तो हिन्दी साहित्य का सीना भी चौड़ा हो गया । भारत में यह पुरूस्कार मूल रूप में हिंदी में लिखे गए उपन्यास “रेत समाधि” के अंग्रेजी अनुवाद “टाॅम्ब ऑफ सैंड” को दिया गया है।
यह पुरस्कार मूल हिंदी भाषा की किसी कृति को पहली बार मिला है। रेत समाधि का अंग्रेजी अनुवाद अमेरिकन अनुवादक डेज़ी राॅकवेल ने किया है। हिन्दी में उपन्यास का प्रकाशन राजकमल ने किया है।पुरस्कार चयन को लेकर गठित जूरी सदस्यों ने इसे चृनित किये गये 6 कृतियों में से चुना।गीतांजलिश्री ने पुरूस्कार राशि राॅकवेल के साथ शेयर करने की घोषणा की है, जोकि करीब 50 लाख रुपए की है।गीतांजलिश्री उत्तर प्रदेश के मैनपुरी की निवासी हैं। पहले भी इनकी कुछ पुस्तकों का अंग्रेजी सहित अन्य विदेशी भाषाओं में अनुवाद हो चुका है।
“रेत समाधि” चंद्रप्रभा देवी नाम की एक महिला की गाथा है। समीक्षकों ने इस उपन्यास के कथालोक में समाये काव्यलोक को भी रेखांकित किया है।
दिल्ली विश्व विद्यालय के लेडी श्रीराम कॉलेज की स्नातक गीतांजलिश्री जेएनयू से इतिहास में परास्नातक (एमए इतिहास) हैं। यह जे एन यू का भी सम्मान है जहां से इस प्रतिभाशाली महिला ने अपनी स्कूली पढाई पूरी की ।