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देश के कई राज्यों में हिन्दु मुस्लिम तनाव के बाद अब जातीय तनाव सामने ,आने लगे है पिछले अप्रैल से मणिपुर जल रहा है ,यहां भू कानून के खिलाफ जब मैतीय समुदाय ने जुवूस निकाला , तब कूकी जनजातीय लोगो ने उन पर हमला कर दिया ,मणिपुर के इम्फाल में मैतीय समुदाय के घरों मे कूकी जनजाकीय लोगो ने हमला कर दिया , आबादी के हिसाब से मणिपुर मे मैतीय समुदाय से ज्यादा लोग विधानसभा मे चुने जाते है , ये नगरीय क्षेत्र मे रहने वाले लोग है , इम्फास मे मैतीय समुदाय के लोग उन्हे जनजाति मे शामिल करने की मांग कर रहे थे । किन्तु इसका कूकी जनजाति बिरोध कर रही थी , इन्होने बिरोध ही नही किया अपितु सैकड़ो मेतीय समुदाय के लोगो के घर ही नही जलाये बल्कि कई लोगों की हत्याये भी कर दी । किन्तु यह मामला मूड़िया की सुर्खियों मे नही आया ।

कुछ दिन पहले जब दो कूकी महिलाओं को कुछ युवकों ने नंगा कर इम्फाल में घुमाया तो यह बीडियो सोसियल मीड़िया मे तैरने लगी , इसके बाद अब राष्ट्रीय मीड़िया मे यह मामला जोर शोर से उठाया जा रहा है , किन्तु यह सोतनीय विषृ है जब मणिपुर मे कई घर जलाये गये हजारों लोगों ने पलायन किया सैकड़ो लोग मारे गये तब यह मामला मीड़िया मे नही आया । देश मे कूकी महिलाओके प्रति सहानुभूति है पर वे लोग भी सहानुभूति के पात्र है जिनकी हत्याये की गई व घर जला दिये गये ।

मणिपुर मे जातीय संघर्ष उग्र रूप ले चुका है किन्तु देश भर में सोसियल मीड़िया मे जो नफरतें व घृणायें फैलाई जा रही है वह बेहद ही शर्मनाक है , बामशेफ मामक संगठन के अध्यक्ष बामन मेश्राप तो देश भर मे दलित रैलिया कर -कर ब्राह्मण समाज के प्रति चिर स्थाई नफरतों को दलितों में भर -भर कर जातीय तनाव की फसल मे खाद बीज ड़ाल रहे है , हिन्दु मुस्लिम के बाद अब देश में सवर्ण बनाम एस सी एस टी व ओ बी सी की लड़ाईया पैदा की जा रही है , ब्राह्मण समाज की हालत ऐसी ही हो रही है जैसी हिटलर के शासनकाल में यहुदियों की थी , हिटलर ने यहुदियों के प्रति इतनी नफरते भरी कि जर्मनी के लोग यहुदियों की सामुहिक हत्याओं पर खुश होने लगे , भारत के कश्मीर मे भी कश्मीरी पंण्ड़ितों के प्रति भी इतनी नफरते भरी गई कि 1982में एक दिन मस्जिदों ले ऐलान हो गया कि पंण्डितों कश्मीर छोड़ो , अन्तत: कश्मीरी पंण्ड़ितों को कश्मीर छोड़ना पड़ा ,

उत्तर प्रदेश मध्य प्रदेश मे ब्राह्मण ओ बी सी ,जाट राजपूतो के बीच संघर्ष चल रहा है ,हरियाण् मे भी यही हालात है , अब समय आ गया है जातिये नफरतों से भरी बयानबाजी पर रोक लगनी चाहिये ।

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