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अल्मोड़ा 31 मई देश के यू पी एस सी परिक्षाओं मे परचम फहराने के बाद जामिया मिलिया इस्लामिया विश्वविद्यालय फिर सुर्खियों मे है । इस बार उत्तराखण्ड़ से भी छात्रों ने अच्छा प्रदर्शन किया है पर इसका श्रेय किसी एक विश्व विद्यालय को नही दिया जा सकता ।

इन दिनों जामिया मिलिया विश्वविद्यालय भी जे एन यू की तरह ही सामप्रदायिक कट्टरपंथियों के निशाने पर है। कई प्रकार के और कई प्रकार के सामाजिक दबाव झेल रहा है,। पर अध्ययन मे रुचि रखने वाले छात्र इससे बेखबर अपने भविष्य के निर्माण मे लगे है ।
यह विश्वविद्यालय हर क्षेत्र में बेहतर प्रदर्शन कर रहा है , इसके लिए विश्वविद्यालय की फैकल्टियों का विशेष योगदान है । सूत्रों ने बताया इस विश्वविद्यालय ने जामिया मिलिया रेजिडेंशियल कोचिंग स्थापित कर छात्रों के भविष्य को सवारा, जिसकी सराहना होनी ही चाहिये ।जामिया मिलिया रेजिडेंशियल कोचिंग से इस वर्ष सिविल सर्विसेज में 23 छात्रों की सफलता के कारण पैदा हुआ है। यह रेजिडेंशियल फ्री कोचिंग प्रतिवर्ष 150 छात्रों को दी जाती है पिछले 10 वर्षों में संस्थान ने देश को 245 सिविल सर्वेंट दिए हैं।
इसके अलावा सैकड़ों की संख्या में छात्र अन्य प्रतिष्ठित सेवाओं में चयनित हुए। उल्लेखनीय है की जामिया में मुस्लिम छात्रों से अधिक संख्या में अन्य वर्गो के छात्रों का चयन होता है।
एक अनुमान के अनुसार कोचिंग से प्रतिवर्ष 50% छात्र यू.पी.एस.सी प्रारंभिक परीक्षा में उत्तीर्ण होते हैं। जबकि अंतिम रूप से 15 से 17% छात्र यूपीएससी परीक्षा में चयनित हो जाते हैं।


इसके अलावा सैकड़ों की संख्या में छात्र अन्य प्रतिष्ठित सेवाओं में चयनित हुए। उल्लेखनीय है की जामिया में मुस्लिम छात्रों से अधिक संख्या में अन्य वर्गो के छात्रों का चयन होता है।
एक अनुमान के अनुसार कोचिंग से प्रतिवर्ष 50% छात्र यू.पी.एस.सी प्रारंभिक परीक्षा में उत्तीर्ण होते हैं। जबकि अंतिम रूप से 15 से 17% छात्र यूपीएससी परीक्षा में चयनित हो जाते हैं।
इस वर्ष यूपीएससी की टॉपर श्रुति शर्मा भी इस रेजिडेंशियल कोचिंग संस्थान की छात्रा है।