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पूरी दुनिया मे कोरोना काल के बाद जो अर्थब्यवस्था चौपट हुई है । उसका असर भारतीय बाजारों मे भी प्रत्यक्ष रूप से देखने को मिल रहा है । युक्रेन रूस युद्ध के चलते जहां युरोप हांफने लगा है वही ऐशियां के हालात भी कोई बेहतर नही है । गिरती अर्थब्यवस्धा का सबसे अधिक लाभ अमेरिकी डालर को हो रहा है । वैश्विक ब्यापार सन्तुलन , अमेरिका री तरफ है चायना की अर्थब्यवस्था मे भी गिरावट है । कई देश चाईनीज कर्ज के मकड़जाल मे ऐसे फंसे है उन्हें इससे निकलने का कोई आसान राह नही दिखाई देती ।कई कम्पनियां अपना निवेश उभरती हुई अर्थब्यवस्था वाले देशो से खींच रही है सूत्र बताते है कि ऐसे वक्त मे पर्याप्त डायरेक्ट इनवेस्टमेंट आना एक शुभ संकेत है ।है, जो भारत भारतीय वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार भारत ने वित्तीय वर्ष 2021-22 में 83.57 अरब डॉलर का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश प्राप्त किया है, जो अभी तक के भारतीय इतिहास में सबसे ज्यादा है आंकड़ो की माने तो ।2003 के मुकाबले इसमें 20 गुना वृद्धि बताई जा रही है हांलाकि इस बीच महंगाई सूचकांग मे भी 2003 के मुकाबले काफी बृद्धि हो चुकी है ।भारतीय वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय ने वित्तीय वर्ष 2021-22 के लिए 83.57 अरब डॉलर के उच्चतम प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) की रिपोर्ट दी है मंत्रालय ने कहा है कि, वित्तीय वर्ष 2003 के मुकाबले साल 2022 में एफडीआई में 20 गुना का इजाफा हुआ है। लिहाजा भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए ये एक शानदार खबर है और आने वाले कुछ सालों में भारतीय बाजारों मे इसके नतीजे दिखाई देंगॆ , । फिलहाल देश मे महंगाई रिकार्ड स्तर पर है ।