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अयोध्या में निर्माणाधीन श्री राम जन्मभूमि मंदिर निर्माण प्रगति निरन्तर जारी है ।इस मन्दिर समिति मे नृपेंद्र मिश्र अध्यक्ष व चम्पत राय महामन्त्री है ।
मन्दिर के निर्माण मे ठेकेदार मेसर्स लार्सन एंड टुब्रो (एल एंड टी) मंदिर और परकोटा (प्राचीर) नियुक्त हैंसूत्रो के अनुसार उस कम्पनी को विशेषज्ञता हासिल है ।मन्दिर निरिमाण के लिये टाटा कंसल्टेंट इंजीनियर्स (टीसीई) परियोजना प्रबंधन सलाहकार नियुक्त हैं , इनके अलावा चार इंजीनियर जिसमें जगदीश आफले पुणे ,आई आई टी-मुंबई, गिरीश सहस्त्र भुजनी गोवा आई आई टी-मुंबई, से जगन्नाथ औरंगाबाद, तथा अविनाश संगमनेरकर नागपुर से शामिल है ये सभी ट्रस्ट की ओर से स्वेच्छा से सेवा दे रहे हैं ।

राम मन्दिर की नीव 05 अगस्त, 2020 को, भारत के माननीय प्रधान मंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने प्रस्तावित मंदिर के गर्भगृह (गर्भगृह) स्थल पर पूजा करके आरम्भ की थी ।

इस मन्दिर का डिजाइन एल एंड टी ने भविष्य मे मन्दिर को स्थायित्व व मजबूती प्रदान करने के लिये बनाया , उसी अनुरूप परीक्षण किया गया था, परंतु आशानुरूप परिणाम नहीं आए नीव मे हल्की मिट्टी मिली तो इस विचार को स्थगित कर दिया गया , यह परीक्षण अगस्त-सितंबर-अक्टूबर, 2020 में किया गया था।नवंबर-2020 में, निदेशक (सेवानिवृत्त)-आईआईटी- दिल्ली की अध्यक्षता में एक विशेषज्ञ समिति का गठन किया गया था। समिति के अन्य सदस्यो मे निदेशक (वर्तमान)-आईआईटी-गुवाहाटी, निदेशक (वर्तमान)-एनआईटी-सूरत, दिल्ली, मुंबई और चेन्नई के आईआईटी के प्रोफेसर, निदेशक-सीबीआरआई-रुड़की, एलएंडटी और टीसीई की ओर से वरिष्ठ इंजीनियरो को शामिल किया गया ।, निर्माण समिति के अध्यक्ष श्री नृपेंद्र मिश्र की प्रेरणा से यह विशेषज्ञ समिति बनी थी।
जीपीआर सर्वेक्षण – नवंबर-2020 के महीने में, नेशनल जियो रिसर्च इंस्टीट्यूट(एनजीआरआई)-हैदराबाद ने निर्माण स्थल पर जमीन का अध्ययन करके और अपनी रिपोर्ट प्रदान करने को कहा ,ताकि नींव के डिजाइन को तय करने में मदद हो सके। एनजीआरआई ने जीपीआर तकनीक का उपयोग करते हुए भू-सर्वेक्षण किया और क्षेत्र की खुली खुदाई करके भूमि के नीचे का मलबा और ढीली मिट्टी को हटाने का सुझाव दिया। यह जीपीआर सर्वेक्षण नवंबर-दिसंबर 2020 में किया गया था। उत्खनन – निर्धारित मंदिर स्थल और उसके आसपास लगभग छह एकड़ भूमि से लगभग 1.85 लाख घन मीटर मलबा और पुरानी ढीली मिट्टी को हटाया गया। इस काम में करीब 3 महीने (जनवरी-फरवरी-मार्च, 2021) लगे। यह स्थल एक विशाल खुली खदान की तरह दिखता था – गर्भगृह में 14 मीटर की गहराई और उसके चारों ओर 12 मीटर की गहराई वाला मलबा व बालू हटाई गई ॥ एक बड़ा गहरा गड्ढा बन गया।बैक-फिलिंग और मिट्टी को सुदृढ़ करने के लिए रोलर कॉम्पैक्ट कंक्रीट (आरसीसी) का उपयोग किया गया । चेन्नई आईआईटी के प्रोफेसरों ने इस विशाल गड्ढे को भरने के लिए विशेष इंजीनियरिंग मिश्रण का सुझाव दिया। आरसीसी कंक्रीट सुझाई गई ,जिसमे परत दर परत के रूप में कंक्रीट डालना था। 12 इंच की एक परत को 10 टन भारी क्षमता वाले रोलर द्वारा 10 इंच तक दबाया जाता था। घनत्व मापा जाता था ॥ गर्भगृह में 56 परत और शेष क्षेत्र में 48 परतों को डाला गया। इसे पूरा होने में अप्रैल 2021 से सितंबर 2021 तक लगभग 6 महीने लगे । उक्त फिलिंग को ‘मिट्टी सुदृढ़ीकरण द्वारा भूमि सुधार’ नाम दिया गया। इसे मानव निर्मित चट्टान कहा जा सकता है , मिट्टी के भीतर विशाल मानव निर्मित चट्टान,कम से कम 1,000 वर्षों के लिए दीर्घायु और स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए बनाई है ॥ अक्टूबर 2021 – जनवरी 2022 के बीच भूमिगत RCC की ऊपरी सतह पर, और अधिक उच्च भार वहन क्षमता की एक और 1.5 मीटर मोटी सेल्फ-कॉम्पैक्टेड कंक्रीट (लगभग 9,000 क्यूबिक मीटर मात्रा में) को 9MtrX 9Mtr के आकार के खंडों में बैचिंग प्लांट, बूम प्लेसर मशीन और मिक्सर का उपयोग करके डाला गया । RAFT के निर्दोष निर्माण के इस चरण में IIT-कानपुर के एक प्रोफेसर और परमाणु रिएक्टर से जुड़े एक वरिष्ठ इंजीनियर ने भी योगदान दिया।
इस प्रकार हम कह सकते हैं कि आर सी सी और RAFT दोनों संयुक्त रूप से, भविष्य के मंदिर के सुपर-स्ट्रक्चर की नींव के रूप में कार्य करेंगे। देश के प्रमुख इंजीनियरिंग संस्थानों और संगठनों के सामूहिक विमर्श का यह परिणाम है। इस RAFT को पूरा होने में अक्टुवर 21 जनवरी 2022 तक का लगभग चार महीने का समय लगा ।मंदिर के फर्श / कुर्सी को ऊंचा करने का कार्य 24 जनवरी 22 , को शुरू हुआ और यह अभी भी प्रगति पर है। प्लिंथ को RAFT की ऊपरी सतह के ऊपर 6.5 मीटर की ऊंचाई तक उठाया जाएगा। । प्लिंथ को ऊंचा करने के लिए कर्नाटक और तेलंगाना के ग्रेनाइट पत्थर के ब्लॉक का इस्तेमाल किया जा रहा है। एक ब्लॉक की लंबाई 5 फीट, चौड़ाई 2.5 फीट और ऊंचाई 3 फीट है। इस कार्य में लगभग 17,000 ग्रेनाइट ब्लॉकों का उपयोग किया जाएगा। सितंबर, 2022 के अंत तक प्लिंथ को ऊंचा करने का काम पूरा होने की अपेक्षा है। बहुत शीघ्र गर्भगृह और उसके आसपास नक्काशीदार बलुआ पत्थरों को रखना प्रारम्भ होगा । प्लिंथ का काम और नक्काशीदार पत्थरों की स्थापना एक साथ जारी रहेगी। राजस्थान के भरतपुर जिले में बंसी-पहाड़पुर क्षेत्र की पहाड़ियों से गुलाबी बलुआ पत्थरों का उपयोग मंदिर निर्माण में किया जा रहा है। मंदिर में करीब 4.70 लाख क्यूबिक फीट नक्काशीदार पत्थरों का इस्तेमाल किया जाएगा। राजस्थान में सिरोही जिले के पिंडवाड़ा कस्बे में नक्काशी स्थल से नक्काशीदार पत्थर अयोध्या पहुंचने लगे हैं।
मंदिर के गर्भगृह क्षेत्र के अंदर राजस्थान की मकराना पहाड़ियों के सफेद संगमरमर का प्रयोग किया जाएगा। मकराना संगमरमर की नक्काशी का कार्य प्रगति पर है और इनमें से कुछ नक्काशीदार संगमरमर के ब्लॉक भी अयोध्या पहुंचने लगे है। मंदिर निर्माण क्षेत्र और उसके प्रांगण के क्षेत्र सहित कुल 8 एकड़ भूमि को घेरते हुए एक आयताकार दो मंजिला परिक्रमा मार्ग परकोटा बनेगा , इसी के पूर्व भाग में प्रवेश द्वार होगा। इसे भी बलुआ पत्थर से बनाया जाएगा। यह परकोटा भीतरी भूतल से 18 फीट ऊंचा है और चौड़ाई में 14 फीट होगा। इस परकोटा में भी 8 से 9 लाख घन फीट पत्थर का उपयोग होगा – इस मंदिर परियोजना में – परकोटा (नक्काशीदार बलुआ पत्थर) के लिए उपयोग किए जाने वाले पत्थरों की मात्रा लगभग 8 से 9 लाख क्यूबिक फीट है, 6.37 लाख घन फीट बिना नक्काशी वाला ग्रेनाइट प्लिंथ के लिए, लगभग 4.70 लाख क्यूबिक फीट नक्काशीदार गुलाबी बलुआ पत्थर मंदिर के लिए, 13,300 घन फीट मकराना सफेद नक्काशीदार संगमरमर गर्भगृह निर्माण के लिए और 95,300 वर्ग फुट फर्श और क्लैडिंग के लिए प्रयोग किया जाएगा।

मन्दिर की रिटेनिंग वॉल मंदिर के चारों ओर मिट्टी के कटान को रोकने और भविष्य में संभावित सरयू बाढ़ से बचाने के लिए दक्षिण , पश्चिम और उत्तर में रिटेनिंग वॉल का निर्माण भी चल रहा है। सबसे निचले तल पर इस वॉल की चौड़ाई 12 मीटर है और नीचे से इस वॉल की कुल ऊंचाई लगभग 14 मीटर होगी। यह ध्यान रखना आवश्यक है कि मंदिर के पूर्व से पश्चिम की ओर के स्तरों में 10 मीटर का अंतर है अर्थात पूर्व की ओर से पश्चिम की ओर ढलान है।
वर्तमान में सभी गतिविधियां एक साथ प्रगति पर हैं, उदाहरण के लिए, गर्भगृह के चारों ओर प्लिंथ और नक्काशीदार गुलाबी बलुआ पत्थर के ब्लॉकों की स्थापना, पिंडवाड़ा में गुलाबी बलुआ पत्थरों की नक्काशी, मकराना मार्बल्स की नक्काशी और आरसीसी रिटेनिंग वॉल निर्माण आदि।जारू है । मंदिर का यह निर्माण कार्य निश्चित ही एक इंजीनियरिंग चमत्कार कहा जायेगा ॥
प्रथम चरण में एक तीर्थ सुविधा केंद्र जिसमें लगभग 25,000 तीर्थयात्रियों को आवश्यक सुविधाएं प्रदान करेगा। इसे पूर्व की दिशा में मंदिर पहुंच मार्ग के निकट बनाया जाएगा।
भगवान वाल्मीकि, केवट, माता शबरी, जटायु, माता सीता, विघ्नेश्वर (गणेश) और शेषावतार (लक्ष्मण) के मंदिर भी योजना में हैं और इन्हें कुल 70 एकड़ क्षेत्र के भीतर परन्तु परकोटा के बाहर मंदिर के आसपास के क्षेत्र में निर्माण किया जायेगा ॥
मंदिर के आयाम:
(i) भूतल पर पूर्व-पश्चिम दिशा में लंबाई – 380 फीट।
(ii) भूतल पर उत्तर-दक्षिण दिशा में चौड़ाई – 250 फीट।
(iii) गर्भगृह पर जमीन से शिखर की ऊंचाई – 161 फीट
(iv) बलुआ पत्थर के स्तंभ- भूतल-166; प्रथम तल -144; दूसरा तल – 82 (कुल-392)

अयोध्या मे राम मन्दिर का कार्य प्रगति पर है । यह राम स्मारक होगा या मन्दिर इस पर मतभेद हो सकते पर पर यह अटल सत्य है कि यह इस सदी की एक ऐसी इमारत होंगी जिसे देखने लोग कई शताब्दियों तक आते व जाते रहेंगे । राम मन्दिर का सपना कई शताब्दियों का सपना है । जो पूरा होगा ।

(v) आम तौर पर हर महीने निर्माण समिति सभी इंजीनियरों और वास्तुकारों के साथ श्री नृपेंद्र मिश्राजी की अध्यक्षता में 2 से 3 दिनों तक बैठती है और प्रत्येक विवरण पर बहुत बारीकी से चर्चा करती है। श्री सी.बी. सोमपुरा, अहमदाबाद मंदिर और परकोटा के वास्तुकार हैं, जबकि श्री जय काकतीकर (डिजाइन एसोसिएट्स, नोएडा) परकोटा से बाहर के शेष क्षेत्र के लिए वास्तुकार हैं।
श्री राम जन्मभूमि मंदिर का निर्माण समग्र, परोपकारी और समकालिक संस्कृति पर आधारित सांस्कृतिक राष्ट्रवाद की रक्षा, संरक्षण और बढ़ावा देने के लिए एक ऐतिहासिक कार्य है। यह देश की राष्ट्रीय एकता और अखंडता को सुनिश्चित करेगा। आने वाली पीढ़ियां इसे सांस्कृतिक स्वतंत्रता और राष्ट्रीय पुनर्निर्माण के लिए अग्रणी कार्य के रूप में देखेंगी।